मात्र फल ही नहीं है जामुन, स्वास्थ्य को पहुँचाता है इतने सारे लाभ

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20th September, 2017 - 11:53 AM, Edited by

नई दिल्ली। जम्बू, जामगाछ, जाम्बु और जंबु भाबल ये सभी जामुन के ही नाम हैं। बारिश का मौसम शुरू होते ही पेड़ों पर जामुन पकने लगता है। जामुन का पेड़ बहुत ऊंचा होता है। इसकी छाल सफेद होती है। बैशाख मास में इसमें मंजरियां आती हैं बाद में फल लगते हैं। इसके वृक्ष पूरे भारत में पाए जाते हैं परन्तु शुष्क स्थानों पर यह वृक्ष नहीं उगता।

जामुन कई तरह का होता है। जंगली जामुन का फल खट्टा और छोटा होता है जबकि अन्य प्रकार के जामुन आकार में बड़े और मीठे होते हैं। जामुन के गूदे में लगभग 84 प्रतिशत जल होता है। साथ ही इसमें लगभग 14 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट तथा अल्प मात्रा में प्रोटीन और वसा भी होता है। इसके अतिरिक्त इसमें विटामिन ए, बी, सी, मेलिक एसिड, गौलिक एसिड, आक्जेलिक एसिड तथा टैनिन भी होता है। अच्छे स्वाद के साथ−साथ जामुन में कई चिकित्सकीय गुण भी हैं। इसके गूदे, गुठली, वृक्ष की छाल तथा पत्तों का अनेक रोगों के इलाज में उपयोग किया जाता है।

जामुन के वृक्ष की छाल रूखी, कसैली, मलरोधक, पाक में मधुर तथा खट्टी होती है। यह पित्त के प्रकोप को दूर करती है तथा रक्त विकारों को दूर कर रक्त को साफ करती है। गले के रोगों तथा कफ को दूर करने में भी यह सहायक होती है। अतिसार होने पर भी इसका प्रयोग किया जाता है। फल के रूप में जामुन भारी, मलरोधक कसैला मीठा, ठंड़ा, मंदाग्निकारक, बादी और कफ पित्त नाशक है। यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार जामुन दूसरे दर्जे में शीत और रूक्ष, उष्ण यकृत को बल देने वाला और गरमी को शांत करने वाला होता है।