Valentine Day Special…प्यार इश्क और मौहबब्त...वादा किया तो निभाना पड़ेगा, हैप्पी प्रोमिस डे

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11th February, 2019, Edited by Shivangi Agarwal

फीचर्स डेस्क। प्यार इश्क और मौहबब्त कहना जितना आसान है, उसे निभाना उतना ही मुशकिल है....कुछ ऐसी ही दास्ता है इस इश्क की सूली पर चढ़े बादों की कहानी...

कोई कहता है जान जाए पर जुबान नहीं जानी चाहिए, तो वही आज कुछ लोगों का कहना है वादें तो बनाएं ही तोड़ने के लिए जाते है। अब कौन कितना सही है...इसका गवाह तो एक सदियों से चला आ रहा यह इतिहास पढ़कर ही आप लगा सकते है। ये वो इतिहास है, जो गवाह है उन प्रेम कहानियों का जो अपने एक वादें को निभाने के लिए घरवालों से लड़ी है, मुल्क से, सियासत से, खुद से, परिवार से... शायद यहीं कहानियां जिनके नाम पर आज भी वादों की अहमियत जिंदा है।

प्यार से जुड़ी उन कहानियों का इतिहास

बाजबहादूर और रूपमति की प्रेम कहानी

बाजबहादुर मालवा के सुल्तान थे। एक समय जब वह शिकार पर निकले थे, उसी दौरान उन्हें जंगल में घूम रही एक लड़की रूपमति को देखा और देखते ही अपना दिल दे बैठे। बस फिर क्या सुल्तान ने उस से शादी की और वादा किया की जिंदगीभर साथ निभाएंगे। सुल्तान एक मुस्लिम परिवार से थे, इसलिए परिवार ने रूपमति को अपनाने से इंकार कर दिया। परिवार और रूपमति के बीच की इस जंग को काफी समय तक लड़ते हुए बाजबहादूर ने कभी भी रूपमति का हाथ नहीं छोड़ा, ये था सुल्तान को वो वादा जो उन्होंने रूपमति से किया था।

सलीम और अनारकली

सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी से कौन रूबरू नहीं है। आज तक सलीम और अनारकली के प्रेम की मिसालें दी जाती है। अनार कली एक नाचनेवाली थी, और सलीम एक सुल्तान। इसी वहज से कभी अकबर को सलीम का ये प्रेम गवारा नहीं हुआ। सलीम की प्रेम कहानी के विलेन बने अकबर ने सलीम के आगे शर्त रखी थी कि या तो सलीम अनारकली को उनके हवाले कर दें, या फिर उनसे युद्ध करें। सलीम ने अनारकली से सच्चे प्यार का वादा किया था तो फिर कैसे झुक जाते शहजादे सलीम आखिर जुबान दी थी। हालांकि सलीम अकबर से युद्ध में हार गए थे, जिसके बाद अकबर ने अनारकली को पत्थर की दीवार में चुनवा दिया।

बाजीराव और मस्तानी

बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी को बाजीराव फिल्म से पहले बहुत कम लोग जानते थे, हालांकि आज भी कई लोगों का कहना है, कि बाजीराव ने मस्तानी से कभी इश्क नहीं किया था। बाजीराव मराठा पेशवा की आन-बान-शान थे। और मस्तानी से उन्हें इश्क युद्ध के दौरान हुआ था, जिसके बाद सारी मराठा हुकुम्त से लड़ते हुए उन्होंने मस्तानी को अपनी दूसरी पत्नी का दर्जा दिया। दोनों के बीच इश्क कुछ इस कदर परवान छड़ा हुआ था, कि दोनों ने एक दुसरे के साथ जिंदगी की हर सांस तक रहने का वादा कि. था। यहीं वजह रही कि जब बाजीराव का मौत हुई तो उनके गम में मस्तानी ने भी उनकी चिता के साथ ही सती हो गई।

शाहजहां और मुमताज

शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी की आज भी हर आशिक कसम खाता है, आज भी जब कोई प्रेमी जोड़ा आगरा के ताजमहल को देखने जाता है, तो यहीं कहता है...कि मैं भी तुमसे उतना ही प्यार करता/करती हूं...जितना शाहजहां ने मुमताज से किया था। आपका बतां दे कि शाहजहां ने मुमताज की याद में यह ताजमहल बनाया था।

सोनी और माहिवाल

सोनी और माहिवाल की प्रेम कहानी को लोग आज तक नहीं भूले है, आज भी पंजाब में उनकी प्रेम कहानी पर गीत और कहानियां लिखी जाती है। इस प्रेम कहानी में सोनी के पिता उनकी जबरन शादी किसी और जगह कर देते है, लेकिन माहिवाल सोनी से किया वादा कि वो सोनी को कभी भूला नहीं पाएंगे को पूरा करने उनके गांव पहुच जाता है, जहां वो शादी के बाद भी एक-दूसरे से मिलते है। अपने प्यार को पूरे करने के लिए दोनों एक साथ जी तो नहीं पाते इसलिए एक साथ मर जाते है। एसी ही कई प्रेम कहानियां जो वादों के साथ शुरू हुई है और वादो के साथ खत्म...इन कहानियों में हीर-रांझा, लैला मजनूं, औरंगजेब-जैनबाई, चंद्रगुप्त-हेलेना, बिम्बीसार-आम्रपाली, पॉथ्वीराज संयुक्ता के साथ-साथ और भी कई आशिक है। इन सभी आशिकों ने प्रेम में के अपने वादे के लिए जान तक दी है।

कुछ ऐसे होते है सच्चे वादे...और वादे निभाने के लिए किए जाते है जनाब...हैप्पी प्रोमिस- डे