Holi Special: ... तो इसलिए जलाई जाती है होली, जानें इसके पीछे कि कहानी

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25th February, 2018 - 7:21 PM, Edited by Priyanka Shukla

कानपुर सिटी। होली कि तैयारी शुरू हो गई है। पूरे देश में ये त्यौहार धूम- धाम से मनाया जाता है। इस साल  होली 2 मार्च को मनाया जाएगा। जबकि होलिका दहन 1 मार्च को है। होली को लेकर कई कहानियां जुड़ी हुई हैं, उन्हीं कहानियां में से एक प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की कहानी है। तो आइए इस कहानी के बारें विस्तार से बताती हूँ...

पूजा करने से माना कर दिया

पौराणिक मान्यताओ कि मानें तो एक शक्तिशाली राजा हिरण्यकश्यप था, जो कि अपने आप को भगवान समझता था और उसकी इच्छा रहती थी कि हर कोई भगवान की तरह उसकी पूजा करें. जबकि हिरण्यकश्यप का बीटा प्रहलाद पूजा करने और भगवान मानने से इनकार कर दिया और जगह भगवान विष्णु की पूजा करनी शुरू कर दी। इस बात से हिरण्यकश्यप काफी नाराज हो गया और अपने ही पुत्र प्रहलाद को कई सजा दी फिर भी जब वह नहीं माना तो अपनी बहन के साथ मिलकर मारने तक का प्लान कर लिया था।

जब बच गए प्रहलाद

हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से मिलकर एक योजना बनाई की वह प्रहलाद को गोद में लेकर चिता पर बैठेगी। दरअसल, पुराणों में कहा गया है कि होलिका के पास एक ऐसा कपड़ा था जिसे ओढ़ने के बाद आग का प्रभाव नहीं पड़ता जबकि प्रहलाद के पास ऐसा कुछ नहीं था जिससे वह अपने को बचा सकते  लेकिन जैसे ही आग जली, तो कपड़ा होलिका के पास से उड़कर प्रहलाद के ऊपर चला गया। इसी तरह प्रहलाद की जान बच गई और उसकी जगह होलिका उस आग में जल गई।

जलाई जाती है बुराई

होली के एक दिन पहले होलिका इसलिए जलाई जाती है कि ताकि इसमें हमारे अन्दर कि  बुराई, अंहकार और नकारात्मकता दूर हो सके। वही होलिका के दूसरे दिन दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को गुलाल लगा कर होली त्योहार की शुभकामनाएं दिया जाता है।