जन्माष्टमी स्पेशल : भारत का एकलौता है ये मंदिर, जहाँ आज के दिन जुटती अनगिनत महिलाएं जानें क्यों !

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3rd September, 2018, Edited by Vineet dubey

फीचर्स डेस्क। वैसे तो हर फेस्टिवल किसी न किसी देवी-देवता से जुड़ा हुआ है। फ़िलहाल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। ऐसे ही मध्यप्रदेश के राजाबाड़ा के पास स्थित यशोदा माता मंदिर में आज के दिन महिलाओं की काफी भीड़ होती है। आज यहाँ गोद भराई का रस्म किया जाता है। दरअसल, यहाँ कि मान्यता है कि यहां चावल, नारियल और मिश्री से यशोदा माता की गोद भरने वाली महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ती होती है।

बता दें कि देश विदेश में भगवान  कृष्ण के हजारों मंदिर है, लेकिन कान्हा को अपनी ममता की छाया में समेटने वाली यशोदा मैया का शायद पूरे विश्व में यह एकलौता मंदिर होगा। जानकार बताते हैं की राजबाड़ा में स्थित यह मंदिर  करीब दो सौ साल पहले का बना हुआ है। इस मंदिर में यशोदा मैया के अलावा नंद बाबा और राधा कृष्ण की प्रतिमाएं भी है। 

मंदिर की स्थापना  223 साल पहले हुई थी

मंदिर के पुजारियों की मानें तो इस मंदिर की स्थापना 223 साल पहले हुई थी। ऐसी मान्यता है कि यहां चावल, नारियल और मिश्री से यशोदा माता की गोद भरने वाली महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ती होती है। जन्माष्टमी पर काफी महिलाएं यहां गोद भराई के लिए आती है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार यहां गोद भराने विदेशों से भी महिलाएं आती है।

बैलगाडी से लाया गया था मां यशोदा की मूर्ति

इस मंदिर की मंदिर स्थापना यहाँ के पुजारी महेंद्र दिक्षीत के दादा के परदादा ने की थी। इस मंदिर को बनवाने की प्रेरणा दादा के परदादा की माताजी ने ही दी थी। उन्होंने कहा था कि कन्हैया को तो सारा संसार पूजता है लेकिन उनको पालने पोसने वाली यशोदा मैया को सब भूल गए है। इसके बाद ही यशोदा माता का मंदिर बनाने का संकल्प लिया गया। फिर इसे इंदौर सिटी से जयपुर गए और मूर्ति लेकर आए थे। 

नन्दबाबा से बड़ी मूर्ति है यशोदा माता की

मंदिर में यशोदा माता के साथ ही नंदबाबा की मूर्ति भी स्थापित है। खास बात यह है कि नंद बाबा की मूर्ति से बड़ी मूर्ति यशोदा माता की है। इसके अलावा राधा-कृष्ण और दाई मां की मूर्ति भी यहां स्थापित है।