Election Analysis: नेहरु, पटेल, गांधी या गोडसे नहीं, बल्कि इस फॉर्मुले से बीजेपी जीती है चुनाव

Slider 1
« »
26th May, 2019, Edited by Abhishek seth

नई दिल्ली. लोकसभा 2019 के परिणाम आ चुके हैं. जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत से जीत हासिल की है. वहीँ विपक्ष बुरी तरह से हार गया. सभी पार्टियों के शीर्ष से लेकर स्थानीय नेताओं ने अपने अपने तरीके से चुनाव प्रचार किया और भीड़ बटोरी. लेकिन क्या इस लोकतांत्रिक देश में वास्तव में केवल मोदी लहर से चुनाव जीती है या फिर इसका कोई और कारण है. आइए जानते हैं इसके बारे में-

लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूती से खड़े रहना अच्छा होता है. चाणक्य की किताब अर्थशास्त्र के अनुसार, ‘राष्ट्र में होने वाले विकास कार्यों में विपक्ष का बहुत बड़ा योगदान होता है.’ वहीँ इस बार देखा जाए तो विपक्ष पूरी तरह से साफ़ दिखा. इस बार का चुनाव सरदार पटेल, नेहरु, गांधी, गोडसे के नाम रहा. हालांकि इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय सीट से 25 से ज्यादा लोगों ने नामांकन भरा था. लेकिन बीजेपी के सफल होने का कारण इनका  जनता से ज़मीनी स्तर से जुड़ना रहा.

इस बार के चुनाव की पूरी रणनीति बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की तैयार की हुई थी. जिस समय सपा-बसपा गठबंधन कर रहे थे और कांग्रेस अपना रोड मैप तैयार कर रही थी. उस समय तक बीजेपी सत्ता में रहेते हुए देशभर में 1000 से ज्यादा जनसभाएं कर चुकी थी. इसके अलावा बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर सबसे ज्यादा मेहनत किया. घर घर जाकर लोगों को भाजपा के बारे में एवं पार्टी की नीतियों के बारे में बताया. इसी के साथ ही उन्होंने मोदी जी द्वारा किए गए विकास कार्यों को भी गिनाया.

विपक्ष ने केवल जनसभा और रोड शो की ओर ध्यान दिया जो कि पूरी तरह असफल रहा. इन्होने कभी भी स्थानीय स्तर पर कोई प्रचार किया ही नहीं. यही कमी रह गई थी, जिसके कारण विपक्ष पूरी तरह असफल रहा. अगर विपक्ष बीजेपी के प्रचार करने की नीतियों को भी अपना लेता तो शायद हो सकता था कि उनमें से कोई एक प्रधानमंत्री बन जाए.