व्यंग्य : होली  का चंदा पूरा गोरख धंधा ! 

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13th March, 2019, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। वर्मा जी कामाल है ये चंदा मांगने वाले एक ही कालोनी से  सुबह से पांच आ गए भाईसाहब एक नम्बर के ढ़ीट है लिए बगेर टस से मस नहीं होते । मना करो तो  होली की दुहाई देने लग जाते  हैं। हमारी  कालोनी के तीनों नुक्कड़ होलीका दहन कर रहे हैं । यहां हम रावण दहन में दिए चंदे से उबरे नहीं की अब ये होलिका दहन आ गया। अरे याद  आया अभी कुछ समय हुआ सरस्वती पूजा का आयोजन किया उसका चंदा भी दिया था।

एक तो मेरे जैसों को सरकार ही नहीं छोड़ती दुनिया भर के टेक्स लगा रखे है, रही सही कसर ये चंदा मांगने वालों ने पूरी कर देते हैं । क्या नेता क्या जनता होली की आड़ में एक दूसरे पर छींटाकशी करने में नहीं चूकते   सब रंग उड़ेलने में लगे खुद का कुर्ता रिन से धुला सफेद ही दिखा रहे दूसरे पर पिचकारी से रंग बरसा रहे।  ऊपर से ये जुमला की बुरान मानो होली है।भई चौधरी जी बात तो तुम सही कह रहे हो।ये चंदे वाला मामला गम्भीर रूप धारण करता जा रहा  है। अरे ये लोग चंदे से अपने शोक पूरे कर रहे हैं । जनता को इमोशनली ब्कलेकमेल करके  सरे आम लूट रहे हैं। मैं तो कहता हूँ इन पर भी आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। आखिर

कोई जबरदस्ती है चंदा देना न दे तो बेइज्जती करते है। वर्मा जी इन लोगों ने चंदा मांगने का रोजगार  बना  लिया है ।सुना मोटी कमाई है इसमें  इनकी टैक्स फ्री ऊपर से पांचों उंगलियां घी में सिर कढ़ाही में सच है चौधरी जी । एक हम हैं इज्ज़त के नाम पे लुटते जा रहे हैं। बुरा न मानो होली के जुमले में रंगे जा रहे।

कंटेंट सोर्स : अर्विना गहलोत, प्रयागराज सिटी ।