शुक्राचार्य के दिए इन खास उपदेश का पालन करेगें तो दूर हो जायेगें सारे दुःख !

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15th March, 2019, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। शुक्राचार्य समस्त शास्त्रों और नीतियों के ज्ञाता होने के साथ समस्त सिद्धियों से भी विभूषित थे। शुक्राचार्य राजनीति में भी प्रवीण थे। उन्होंने व्यक्ति विशेष के जीवन यापन के लिए अनेक नीतियाँ बताई है जिनको यदि व्यक्ति जीवन मे उतार लें तो कभी भी दुःखी हो ही नहीं सकता। न कभी जीवन के किसी भी विकट मोड़ पे भी असफल हो सकता है। शुक्र नीति का जो भी कोई अनुसरण करेगा वो कम से कम समय अधिक से अधिक उपलब्धि प्राप्त कर पायेगा।

मित्र सोच समझ कर बनाये

यो हि मित्रमविज्ञाय याथातथ्येन मन्दधीः। मित्रार्थो योजयत्येनं तस्य सोर्थोवसीदति।। आजकल इंसान बस मित्रों की लंबी लिस्ट तैयार करने में लगा है वो अच्छे है या बुरे ये सोचने का इनके पास समय ही नहीं है।कोई भी कभी भी किसी भी वक़्त काम आ सकता है ये सोच बन गई है मगर ये सोच गलत है। मित्र जीवन की बहुत बड़ी पूँजी होती है।बुरे से बुरे वक्त को भी जो अच्छे वक़्त में परिणित करने की काबिलियत रखे उसे ही सच्चा मित्र कह सकते हैं। मित्र बनाने से पहले कुछ बातों का ध्यान देना अवश्य आवश्यक है बिना सोचे-समझे या बिना विचार किए किसी से भी मित्रता करना व्यक्ति के लिए नुकसानदायक हो सकता हैं। जिस व्यक्ति में संस्कार अच्छे हो उसके गुण अच्छे हो सकते हैं मगर फिर भी मित्र बनाने से पहले उसके गुण-अवगुण, उसकी अच्छी बुरी आदतें, उसके आत्मिक विचार, उसकी सोच इत्यादि, इन सभी की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।सु नी सुनाई बातों पर विश्वास कम करें। स्वयं ही पहले परख ले बाद में पछतावा होने से अच्छा है पहला कदम ही सावधानी से रखें। बुरी संगत, बुरी आदतों वाले और बुरे संस्कार वाले लोगों से जितना बचे उतना ही जीवन सुरक्षित रहेगा।

दूरदर्शी अवश्य बने मगर दीर्घसूत्री न बने

दीर्घदर्शी सदा च स्यात्, चिरकारी भवेन्न हि। मनुष्य को अपना हर कार्य सोच विचार कर शुरू करना चाहिए।कोई भी कार्य अवश्य कल की सोच कर शुरू करे मगर कोई भी कार्य कल करने पर न टालें।रात गई तो बात गई।कल कभी नही आता।हो सके उतने काम आज करने का प्रयास करें। आज करने की प्रवृत्ति आपको आलसी होने से रोकती है। आज करने की प्रवृत्ति आपको सदैव सचेत और अनुशासित बनाती है। अतः जितना हो सके आज के प्रति सजग रहें।

जरूरत से ज्यादा किसी पे विश्वास न करें

नात्यन्तं विश्र्वसेत् कच्चिद् विश्र्वस्तमपि सर्वदा। किसी भी जाने अनजाने व्यक्ति पर आँख बंद करके भरोसा मत करो। अक्सर विश्वास घात वही करता है जो आपका विश्वास जीतने की कोशिश करता है।जीवन में कोई भी हो मगर उस पर विश्वास करने से पहले उसका आंकलन अवश्य कर ले।फिर भी पूरी तरह विश्वास न करें। अपना कोई भी कार्य किसी के भी पूर्ण रूप से सुपुर्द करने से पहले बहुत बार सोचें।क्योंकि कई लोग आपके विश्वास का फायदा उठा कर आपके लिए नुकसानदायक स्तिथियाँ पैदा कर सकता है। अतः हर समय अपने मस्तिष्क को सचेत रखें और अपने चक्षु को खुला रखें।और जिन पर आपका पूरा पूरा भरोसा हो बार बार उनकी भी परीक्षा लेते रहें।

धर्म पर चलने वाले कि कीर्ति का कभी नाश नहीं होता

धर्मनीतिपरो राजा चिरं कीर्ति स चाश्नुते। हर व्यक्ति जो अपनी जीवन मे यश कीर्ति पाना चाहता हो उसे कभी भी अधर्म के मार्ग का अनुसरण नहीं करना चाहिए। धर्म का सम्मान करने वाले का कभी कहीं अपमान नहीं होता। जो भी व्यक्ति अपने दिनचर्या में से कुछ समय निकाल कर ईश्वर आराधना करता है उसको कभी भी धर्म से विमुख नहीं होना पड़ता।धर्म सदैव उसके साथ खड़ा रहता है और जिसके साथ धर्म खड़ा हो वो कभी भी पराजित नही होता। अतः अपने आपको अधिक से अधिक धार्मिक बनाने का प्रयास करते रहें। धर्म का जो भी कोई सम्मान करता है उसका हर जगह सम्मान बढ़ जाता है। क्योंकि धर्म और धार्मिक ग्रंथ स्वयं देवताओं से जुड़े हैं और धार्मिक गर्न्थो से जुड़ने से ईश्वर कृपा बरसती रहती है। सदा स्मरण रहे धर्म और धार्मिक ग्रन्थ हमारी गरिमा को बनाये रखते है अतः न तो कभी इनका अपमान करें और न ही कभी ऐसे निकृष्ट विचारों वाले लोगो से जुड़े जो पाप में लिप्त रहते हो।

अन्न देवता का कभी अपमान न करें

अन्नं न निन्घात्। अन्न को देवता की संज्ञा दी गई है अतः अन्न को सदैव देवता की तरह ही पूजे। क्योंकि अनाज ही जो व्यक्ति मात्र का पोषण करता है।जीवन जीने का जल के बाद प्रथम आधार अन्न ही है। अतः अन्न का अपमान ईश्वर का अपमान है। संसार के सभी गर्न्थो में अन्न का सम्मान बताया गया है।साथ ही अन्न दान को भी सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अपने भोजन में से किसी को कुछ दान देना सर्वोच्च माना गया है। अतः को देवता के समान सम्मान दे तो कभी किसी भी प्रकार का दुःख जीवन मे नहीं आ सकता है। अपने जीवन को महत्वपूर्ण समझ कर इन बातों को जीवन मे उतारे ताकि जीवन में कभी भी पछताना न पड़े।

कंटेंट सोर्स : स्वामिनी अंजू, खामगांव महारास्ट्र।