Valentine Special 2019: नेहा की आँखों ने निशांत की आखों से पूछा कैसे रहेंगे हम?

Slider 1
« »
6th February, 2019, Edited by Neeraj tripathi

फीचर्स डेस्क। नेहा को अभी सप्ताह भर हुआ था आगरा से ट्रासफर आई थी ब्रांच मैनेजर बनकर। जबकि इस साल निशांत का ब्रांच मैनेजर प्रमोशन होते होते रह गया था। वर्ना आज वह भी राउंड टेबल से निकालकर किसी ब्रांच केबिन में बैठा होता। हलाकि इस सप्ताह वह अपने प्रमोशन को लेकर दुखी कम और नेहा को बॉस के रूप में देख कर खुश अधिक था। निशांत जिस पोस्ट पर काम कर रहा था उसको लेकर उसकी 10 बार से अधिक नेहा के केबिन में जाने और कई बार लैंडलाइन से फ़ोन का मौका तोफा के रूप में मिला गया था। दिन ऐसे ही सुहाने सपनों में कट रहे थे गुड मोर्निंग जितनी मीठी लगाती थी गुड नाईट उतनी ही फीकी। शाम को ऑफिस से आने के बाद निशांत ये 12 घंटे ऐसे बिताया करता था जैसे ट्रेन में परेशान यात्री स्टेशन देख-देख कर दूरी कम होते रास्ते पर संतोष करता है।  

कहते हैं न इश्क जो न करावे, नेहा ने अभी 15 दिन के नये सिटी और नये ऑफिस में निशांत को सबसे नजदीक पाया था। दरअसल, निशांत सोचता था उसकी बेताबी नेहा को नहीं पता, लेकिन महिलाएं उनको कौन किस नजर से देख रहा है बड़े बखूबी समझ जाती हैं। लेकिन ऑफिस का मेनर और अपनी पोस्ट की गरिमा के कारण नेहा निशांत से सिर्फ काम की बात करती थी। लेकिन आज सपनों की उडान उस समय आकाश में उड़ने लगे जब नेहा ने केबिन से फ़ोन किया और रिसीवर उठाते ही बोली निशांत बोलो नहीं सिर्फ सुनों। जी, हलाकि निशांत के मुह से सिर्फ जी, सुनकर कलिग बगल में बैठी सुनीता झा तिरछी नजर से देखी जरुर लेकिन बात समझ न पाने के कारण वो अपने काम में उलझ गईं।  

तुम काम पूरा करके गोमतीनगर नगर के उस फला चौराहे पर मिलो कुछ सामान लेना है घर के लिए और और भी। निशांत का दिल कर रहा था जैसे उठे और चौराहे पर जाकर खड़ा हो जाय पर अभी 2 घंटे बचे थे, जबकि नेहा बोलकर अपने काम में लग गई। मौका मिला तो निशांत केबिन में पहुच गया नेहा से सिग्नेचर कराया और एक बार नजर मिली तो नेहा ने कहा टाइम से ! निशांत जी, और लैट्री लगी जैसी खुशी लेकर झटके से अपने सिट आ गया।  

कैसे तैसे काम खत्म हुआ और बाइक लेकर निशांत तेजी से भागा, इधर नेहा ने कार निकाली तो नोटिस किया कि निशांत की बाइक नहीं दिख रही है। वह भी पहुची नियत स्थान पर। निशांत भूख लगी है कुछ खाते हैं फिर चलते हैंनेहा ने कहा। जी, जबकि निशांत की तो महीनों भर भूख न लगने वाली खुशी मिल गई थी। दोनों रेस्टोरेंट पहुचे और मीनू देखे बिना नेहा ने दो दोसा का आर्डर दे डाला। दोसा का आर्डर निशांत के लिए दूसरा सरप्राईज था क्योकि उसको बहुत पसंद था।  

हाँ तो निशांत ! यार तुम्हारे सिटी में और क्या-क्या देखने लायक है। मैडम, काफी कुछ और यहाँ के लोग भी बड़ें अदब से आपसे पेश आएगे। हाँ वो तो मै 15 दिन से देख रहीं हूँ। अभी डोसे का पहला निवाला मुह में जाने वाला था कि हाथ काप उठा। अरे नहीं जी मजाक कर रहीं थी, लेकिन निशांत को पता था कि न तो यह मजाक है और न ही नेहा का बोलने का अंदाज मजाक जैसा। सॉरी मैडम, किस बात की सॉरी? कोई बात नहीं। जानते हो निशांत जब मै कालेज में थी तो कई लड़के मुझपर मरते थे और मै पढ़ती थी। आज वो छोटे– छोटे काम कर रहें हैं और मैं तुम्हारे सामने हूँ।  अपने आदत के अनुसार डोसा खत्म होते ही बेटर आकर बोला मैडम कुछ और?

एक बार निशांत की तरफ देख कर नेहा जानना चाही की और क्या लेगा लेकिन निशांत ने ना बोला दिया। फिर भी नेहा ने कहा 2 कोल्ड काफी।  

इसके बाद बिग बाजार पहुचे दोनों, कीचन सेट, खाने-पिने की चीजे और फिर नजरे बेडसीट आ गईं। निशांत ने यहाँ अपनी च्वाइस नेहा के सामने दिखाने का प्रयास किया निशांत बेडसीट दिखा रहा था और नेहा निशांत का फेस देख कर उसके एक्सपीरियंस की कायल हो रही थी। बेडसीट के बाद पर्दें लेते वक्त नेहा ने कहा निशांत घर के ये सब काम तुम करते हो। नहीं मैडम, फिर इतनी बेस्ट च्वाइस? बस आपको क्या पसंद आएगा ये समझने की कोशिश कर रहा हूँ। स्टोर सी निकाल कर अपने-अपने घर तो चले गए लेकिन निशांत रात भर जगता रहा। सुबह जब बैंक पहुंचा तो काम में लग गया। काम करते हुए कई महीने बीत गए। इस बीच फिर डोसा कभी नहीं लेकिन थोड़ी से केबिन में जाने पर मिलती होठो की मुस्कुराहट पोलियो के दो बुद जिन्दगी के जैसे लगता था।  

फिर समय आया एक दिन पूरा ऑफिस बैलून से सजा था निशांत ऑफिस पहुंचा तो पूछा किसका बर्थडे है? लेकिन किसी ने नहीं बताया। एक बारगी नेहा केबिन से निकल कर आई तो उसके हाथ में एक पेपर था। निशांत पिछले साल की कमी पूरी हो गई। मतलब मैडम? अरे भाई यू आर प्रमोटेड फॉर इटावा ब्रांच मैनेजर। फिर एक साथ सभी की तालियों से पूरा बैंक गुज उठा। निशांत के मेहनत रंग लाई थी लेकिन प्रमोशन में नेहा का पूरा हाथ था ये सबको पता था। केक का टुकड़ा जैसे ही मुह के पास निशांत ने लगाया नेहा की आँखों ने निशांत की आखों से पूछा कैसे रहेंगे हम? इसके पहले कि ये आसू कोई देखें नेहा पलट कर केबिन जा पहुचीं बाहर सेलिब्रेशन का दौर चल रहा था और निशांत की आखें नेहा के जवाब खोज रहीं थीं।  

दुसरे दिन, आज फेयरवेल था नेहा ने किसी तरह अपने को सभाला और निशांत ने अपने दर्द को बांध कर रखा।  पूरी पार्टी हुई, लोगों ने बधाई के साथ-साथ निशांत के साथ किये हुए काम और अनुभव साझा कर रहें थे। सामने चेयर पर बैठी नेहा ने सबकी बातें सुन रहीं थी और खुद क्या बोलेगी ये समझ नहीं पा रही थी। जब नेहा को बोलना हुआ तो कहा- निशात ये मेरी तीसरी पोस्टिंग है पर इतने लोगों के साथ काम करने के बाद दावे के साथ कह सकती हु- कि तुमे अब आगे का प्रमोशन मुझे पहले पाओगे। लेकिन निशांत ने सिर्फ थैंक्स बड़ें मुश्किल से बोल पाया।  

अब आखरी दिन था तो नेहा ने केबिन में बुलाकर बैठा लिया बोला आज काम नहीं।  बार बार काम करते हुए निशांत पर नजर जाती नेहा की तो “निशांत एकदम शांत” दिखता। कुछ बोलोगे भी नेहा ने कहा। मुझे ये परमोशन नहीं चाहिए। आपके निचे ही मै खुश रहूगा। नहीं निशांत आगे बढ़ो नेहा ने कहा। नेक्स्ट महीने तुम्हारे जॉब सिटी आ सकती हूँ ! और मै न जाऊ तो निशान्त ने कहा। पागल न बनों खुश रहो। अच्छा शादी कब कर रहे हों! नहीं पता मैडम, अब मैडम नहीं, नेहा बोलो तुम भी मैनेजर हो। मुश्किल था लेकिन शाम हुई और अपने अपने घर चले गए। रात को नेहा बधाई फिर से बधाई देने के लिए मोबाईल उठाती फिर रुक जाती। ऐसे ही रात को 2 बज गए, जब मन नहीं माना तो डायल कर दिया लेकिन आधी घंटी के बाद काट दिया। जबकि बेताबी और बेबसी में जी रहे निशांत ने तुरंत काल बैक किया और सिर्फ हेलो बोलकर शांत हो गया नेहा ने कहा – आई विश यू हार्टली निशांत।  

फिर कुछ दिन बाद निशांत ने फ़ोन किया अपने एक पुराने सहकर्मी को तो पता लगा नेहा मैडम की 20 जून को शादी है। अब इस बात को पुख्ता करने के लिए निशांत ने नेहा को फ़ोन नहीं कर सका। नेहा के बारें में जानकारी निशांत के लिए ये आखिरी मौका था। कुछ ही दिनों बाद निशांत जब ऑफिस पहुचा तो सामने टेबल पर नेहा के शादी का कार्ड रखा था। अब और अधिक जानने-सुनने को निशांत के पास कुछ नहीं बचा था।