रावण की 7 विशेषताएं, जिसने रावण को बनाया महान

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18th October, 2018, Edited by Focus24 team

वाराणसी सिटी। विजयदशमी का माहौल चल रहा है। विजयदशमी को अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध कर धरती को पापमुक्त कर दिया था। रावण का नाम जेहन में आते ही एक भयंकर राक्षस का चित्र जेहन में उतरने लगता है। लेकिन वास्तव में रावण ऐसा नहीं था। आइए जानते हैं रावण की कुछ विशेषताओं के बारे में-

ब्राह्मण और राक्षस

रावण के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि रावण आधा ब्राह्मण और आधा राक्षस था। क्योंकि रावण के पिता विश्वश्रवा ब्राह्मण और माता कैकसी राक्षसी थी। यही कारण है कि रावण को आधा ब्राह्मण और आधा राक्षस माना जाता है।

संगीत प्रेमी

कहा जाता है कि रावण संगीत पुजारी था। कहने का भाव है कि उसे संगीत का बहुत शौक था। वो संगीत जानता भी था, उसे वीणा बजाना बहुत पसंद करता था।

शिवभक्त

कहा जाता है न ही कलियुग में उससे बड़ा न कोई शिवभक्त था, न है और न ही होगा। अपनी भक्ति से उसने खुद को शिव के परम भक्तों में स्थान दिलवाया था।

शास्त्र ज्ञाता

रावण के पास असीम ज्ञान का भंडार था, इसीलिए उसे परम ज्ञानी का पद प्राप्त था। उसने 6 शास्त्रों की रचना की थी। इसके अलावा रावण ने योग, धर्मा, कामा, अर्थ, मोक्ष और नाव्या शास्त्र भी लिखे थे। रावण शिव का परम भक्त, यम और सूर्य तक को अपना प्रताप झेलने के लिए विवश कर देने वाला, प्रकांड विद्वान था।

कई भाषाओं का ज्ञाता

शास्त्रों का ज्ञाता होने के साथ ही रावण कई भाषाओं का ज्ञाता भी था। हालाकिं वह बोलचाल में तमिल भाषा का ही प्रयोग करता था।

परम शक्तिशाली

रावण प्राचीन काल का महाप्रतापी राजा था। उसने एक बार हठ में आकर भगवान शिव को कैलाश पर्वत समेत उठा अपने ऊपर उठा लिया था। इसके अलावा उसने नवग्रहों को भी बन्दी बना लिया था।

कुशल राजनीतिज्ञ

वो एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ तत्व ज्ञानी और बहु-विद्याओं का भी जानकार था। रावण को रामायण का ऐसा पात्र कहा गया है, जो राम के उज्ज्वल चरित्र को उभारने का काम करता है।