Teachers Day Special: बच्चों के जीवन में शिक्षा का प्रकाश फैला रहे ये शिक्षक

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5th September, 2018, Edited by Priyanka Shukla

इलाहाबाद सिटी। आजकल शिक्षा रूपी गंगा तो हर शहर में बह रहीं हैं, बहुतों ने तो इसे बिजनेस बना रखा है तो कोई स्टूडेंट्स के साथ फ्राड कर रहा है। जबकि प्रयाग सिटी में कुछ ऐसे भी महान शिक्षक शख्स हैं जो इसे बिजनेस न बनाते हुए उन बच्चों को फ्री क्लास देकर उनके हौसले को बुलंद कर रहें हैं, जो गरोबी के कारण दिहाड़ी मजदूरी को ही अपना नसीब मान रखें थे। दरअसल, आज पाँच सितम्बर यानि पूर्व राष्ट्रपति डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस ही नहीं वरन् देश के शिक्षको को समर्पित दिवस "शिक्षक दिवस" के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन शिक्षकों का कार्य दायित्व भी बढ़ जाता है। सरकारी, गैरसरकारी शिक्षा संस्थान तो अपना शिक्षण दायित्व निर्वहन कर ही रहे हैं साथ ही कुछ स्वयंसेवी शिक्षक भी इस काम में लगातार जुटे हुए हैं।

बीस पच्चीस बच्चों के साथ शुरू किया था पढ़ाना

गाँव में जहाँ कुछ विषयों के एक्सपर्ट शिक्षक नहीं मिलते या कुछ बच्चे पढ़ने के लिए बेताब रहते पर उन्हें अवसर नहीं मिल पाता। उन्हें भी इस अवसर का लाभ दिलाने वाले एक शिक्षक एजाज खलील का नाम उभर कर सामने आता है। एजाज ने कौशाम्बी के इलाके में करीब बीस पच्चीस बच्चों के साथ यह पुनीत का शुरू किया है। एजाज का कहना है कि शुरू में उन्हें समय को लेकर काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। पर बच्चों में अति उत्साह देखकर उनका शिक्षक जाग उठा। और उन्होंने बच्चों के लिए समय निकाला। अब उन्हें बच्चों को पढ़ाने में काफी सुकून मिलता है। एजाज जैसे शिक्षक ही वास्तव में शिक्षक दिवस की धरोहर हैं।

शिक्षा दान का समय निर्धारित कर रखा है नेहा ने

दूसरी ओर नेहा दुबे ने अपने दैनिक जीवन में शिक्षा दान का संकल्प ले रखा है। नेहा ने अपने समय सारिणी में शिक्षा दान का समय निर्धारित कर रखा है। वह शाम को साढ़े चार से साढ़े छह बजे का समय असहाय बच्चों के लिए रखती हैं। नेहा जी उन बच्चों को निशुल्क शिक्षा देती हैं जो बच्चे स्कूल भी नहीं जा पाते। बच्चों को पढ़ाकर उन्हें काफी राहत मिलती है। नेहा जी को ईश्वर पर विश्वास है। वो शाम को शिव मंदिर भी जाती हैं। उन्हें बच्चों को पढ़ाने में मजा आने लगा है। उनसे पूछने पर कि शिक्षक दिवस पर आप क्या कहना चाहती हैं।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को किसी न किसी को जरूर शिक्षित करना चाहिए। शिक्षा दान से बढ़कर कोई दान नहीं हो सकता। नेहा न केवल बच्चों को मुफ्त पढ़ाती हैं वरन् वह सामाजिक कार्यों में भी अभिरुचि रखती हैं। सचमुच हमें नेहा और एजाज जैसे शिक्षकों को नमन करना चाहिए और इनसे सीख लेते हुए समाज को अपना योगदान देना चाहिए।

इनपुट : राकेश मालवीय, इलाहाबाद सिटी।