भारत माता की पहली तस्वीर किसने बनाई थी, क्या जानते हैं वो कहानी...पढें

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15th August, 2019, Edited by manish shukla

अमरीश मनीश शुक्ल
हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को देश भक्ति हमारे सीने में हिलोर मारने लगती है। किसी के मन में तिरंगा तो किसी के मन में देश भक्तों की तस्वीर उभर आती है। मन में देश भक्ति वाले गीतों की बयार चल पड़ती है। लेकिन, इन्ही सब के बीच एक तस्वीर उभरती है, हमारे जेहन में, जिसे हम भारत मां कहते हैं। एक ऐसी तस्वीर जिसकी कल्पना ने करोड़ों हिंदुस्तानियों को एक मां के साथ रिश्ता जोड़ दिया था। एक ऐसी आभा जिसने देश को मां का स्वरूप दे दिया था। आपने भी भारत मां की तस्वीर कयी बार देखी होगी, आपके स्कूल कालेज, घर, मोबाइल या इंटरनेट, टीवी आदि पर। पर क्या आप जानते हैं यह तस्वीर कैसे अस्तित्व में आयी। किसने इस तस्वीर को पहली बार अपनी कल्पना से आकार दिया था। वैसे तो बहुत ही गिने चुने लोग ही इसके बारे में जानते होंगे। लेकिन आज हम आपको भारत मां की पहली तस्वीर के बारे में सबकुछ बताने जा रहे हैं तो पढिये कैसे अस्तित्व में आई भारत मां की तस्वीर । 

एक टीचर की थी कल्पना 


भारत माता की पहली तस्वीर बनाने का श्रेय या कहें कि इस कल्पना को आकार देने का कार्य गुजरात के अहमदाबाद में एक टीचर ने किया था। इनका नाम मगनलाल शर्मा था । देश भक्ति के रंग में रंगे मगन लाल ने साल 1306 में भारत माता की पहली तस्वीर बनाई और इस तस्वीर को उन्होंने नाम दिया 'हिंद देवी'। यह तस्वीर समय के साथ ऐसी प्रसिद्ध हुई कि भारत के कोने कोने में इसकी प्रतियां पहुंची। 

राजा रवि वर्मा के प्रेस में छपी प्रतियां


भारत माता की तस्वीर बनने के दौरान देश पर अंग्रेजों का कब्जा था। गुलामी में हिंदुस्तान जकड़ा हुआ था और उस दरमियान इस तस्वीर ने इंकलाब को मानों आकार दे दिया था। रातो रात इस तस्वीर की चर्चा क्रांतिकारियों तक भी पहुंच गयी थी। लेकिन इस तस्वीर को जन जन तक पहुंचाने का काम राजा रवि वर्मा के प्रेस ने किया। राजा रवि वर्मा के जर्मनी स्थित प्रेस में इस तस्वीर की हजारों प्रतियां तैयार की गयी। यह तस्वीर अखंड भारत का प्रतीक बन गयी और देखते ही देखते क्रांतिकारियों से लेकर देश के कोने कोने में यह तस्वीर पहुंचने लगी। 

कैसी थी पहली तस्वीर 


हिंद की देवी के नाम से सुप्रसिद्ध हुई इस तस्वीर में भारत माता का सिर मुकुट कश्मीर में दिखाया गया था और उनका पैर श्रीलंका को स्पर्श कर रहा था। भारत माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल था जो सिंध प्रदेश से लेकर अफगानिस्तान तक अपने आकार से अखंड भारत के एक हिस्से को अपने साथ जोड़ रहा था। भारत माता की साड़ी को इस तरह से बनाया गया था, जिससे वह पश्चिम बंगाल तक का हिस्सा अखंड भारत से जोड़ रही थी। वहीं, भारत माता के केश यानी बाल हिमालय की चोटियों से लेकर पश्चिम से पूर्व की ओर लहरा रहे हैं। जबकि उनका आंचल लहराता हुआ पूर्वी भारत के पूरे हिस्से को अखंड भारत से जोड़ कर दर्शा रहा है।