सच्चा इश्क़...

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29th September, 2019, Edited by Shivangi Agarwal

फीचर्स डेस्क। ये कहानी है एक ऐसे क्रन्तिकारी की जिसे अपने देश से सच्चा इश्क़ था। "गुमनाम क्रांतिकारी" हाँ,यही नाम तो दिया था लोगों ने उसे। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ना और देश को आजाद करवाना यही मकसद था उसके जीवन का। याद है उसे जब उसने चन्द्रशेखर आजाद का साथ देने की बात की थी तो कैसे पिता ने धमकाया था क्योंकि वो अंग्रेजों के यहां नौकरी करते थे।माँ ने जहर खा लेने की धमकी दी थी। शायद दोनों को डर था इकलौते बेटे को खो देने का। पर देश से इश्क़ ऐसा इश्क़ है जो चाह के भी भुलाया नहीं जा सकता। उसने भी प्रण लिया था चाहे जो हो देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करवाना ही है।हवा के झोंके की तरह कब आता और अंग्रेजों को लूट कर कहाँ गायब हो जाता ये गुमनाम क्रन्तिकारी किसी को पता भी नहीं चलता था।उसका चेहरा भी तो हमेशा ढका हुआ रहता था। अंग्रेजों को लूटना और गरीबों में बाँट देना यही उसका काम था। चन्द्रशेखर आजाद के साथ हर मोर्चे में आगे आगे रहता था।कुछ ही समय में ये गुमनाम क्रन्तिकारी लोगों के बीच प्रसिद्ध हो गया था।

पर कहते हैं न कि इश्क़ और मुश्क छुपाये नहीं छुपते। तो फिर ये इश्क़ तो देश से था वो भला कैसे छिपता।एक दिन एक अंग्रेज पर बम फेंक कर भागते वक़्त चेहरे का कपड़ा जरा सा हट गया और उसके पिताजी जो उस वक़्त अंग्रेज के साथ थे उन्होंने उसे देख लिया और पहचान लिया। घर आ कर बेटे को डाँटना शुरू कर दिया तो क्रन्तिकारी ने कहा,आपको गुलामी पसन्द होगी पर मैं अपने देश को ऐसे गुलाम बने नहीं देख सकता। जान दे दूंगा पर आजादी हासिल करके रहूंगा।

माँ और पिता की आँखों में आंसू आ गए और हाथ जोड़ कर बोले हमें माफ़ कर दो बेटा हम डरते हैं एक तुम्हीं तो हमारे जीवन के सहारे हो तुम्हें कुछ हो गया तो बुढ़ापे में हमारा क्या होगा। माँ,पिताजी अपनी अकेले की जान बचाने के लिए मैं देश को ऐसे गुलाम बने नहीं देख सकता। ठीक है बेटा, तुम तुम्हारा कर्म करो हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है। फिर तो वो देश का दीवाना खुलेआम सबके सामने आ गया और अंग्रेजों के खिलाफ हल्ला बोल दिया और एक दिन हंसते हंसते फांसी पर झूल गया। देश से सच्चा इश्क़ उसने साबित कर ही दिया।

इनपुट सोर्स : रिमझिम अग्रवाल, बड़ोदरा, गुजरात।