तू पूरा शहर बनारस है.....

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15th March, 2019, Edited by Focus24 team

सर से लेकर पाँव तलक, तू पूरा शहर बनारस है!

तेरे छुवन से कितने कनक हुए,तेरे हांथ जैसे पारस है!

तेरे आंखों मे है अज़ब सी मस्ती,गजब है इनकी ठाट!

इनमें बसी लहरें गंगा की,ये लगे मुझे चौरासी घाट!

ये तेरी उलझी हुई लटें,यू करें हवा में अठखेलियां!

कोई कैसे ना गुम हो जाए,ये लगे बनारस की गलियां!

तेरे सादगी की क्या मिशाल दूँ,तू तो गंगाजल सी पावस है!

सर से लेकर पांव तलक,तू पूरा शहर बनारस है!

तु बोले तो यूँ लगे जैसे बिस्मिल्लाह की शहनाई हो!

तेरी बातें मन को निर्मल कर दे, जैसे तुलसी की चौपाई हो!

तेरी चटक चांदनी से रौशन लगे शहर,चाहे रात अमावस है!

सर से लेकर पांव तलक,तू पूरा शहर बनारस है!

"शैल" तुझमे यूं खोया,जैसे भटका हुआ मुसाफिर हो!

रहने वाला इसी शहर का,फिर भी जैसे काफिर हो!

खाक़ हो जाऊँ,की मुझको मोक्ष मिले,तेरे प्रेम की ऐसी तापस है!

सर से लेकर पांव तक,तू पूरा शहर बनारस है!

कंटेंट सोर्स : शैलेन्द्र गुप्ता 'शैल' , वाराणसी सिटी।