अर्धनारिश्वर

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4th March, 2019, Edited by Focus24 team

आज शिवमय है संसार शिव की महिमा शिव ही जाने
तीन लोक के पालनहार जाने अंजाने जो भी जपता
सबके दुख हरते ,दुख हरता आशुतोष,तू औढरदानी

तेरे भक्त सभी अज्ञानी कंद मुल से खुश हो जाते
नंदी बैल है तेरी सवारी गले सर्प की माला प्यारी 
हे त्रिपुरारी तेरी लीला न्यारी भूत पिशाच देव और मानव

सबके साथी सबके बाबा नाच नचाते सबको रिझाते
फिर भी भोले नाथ कहाते कण कण में तु रमता जोगी
होकर के बिल्कुल मनमौजी एक नजर जो डाले होते
हे शिवशंकर सब दुख हरते कैसे करुँ पूकार मैं तेरी

भाव भक्ति मैं जानू ना हे अभयंकर हे करुणा कर
मुझ में ऐसी भाव जगा दे तेरी लीला में खो जाऊँ
तुझ समान निर्लिप्त हो जाउँ ओम ओम का ध्वनि करुं मैं

मेरी नैया पार लगाना निश्छल जानकर शरण तू देना
गंगाजल मैं ला नहीं पाया बस तेरी ही शरण में आया
हे शिव शम्भो हे करुणाकर हे औढरदानी जगत परमेश्वर
स्वीकार करो अब मेरा प्रणाम जीवन नैया पार लगाना

कभी मुझे तुम ना बिसराना चेतन हों या अवचेतन मन 
मौन हों या मौत का आगोश ओम की ध्वनि सुनाई दे
बस इतनी सी दया करना भगवान ओम नमः शिवाय।

कंटेंट सोर्स : आरती राय, दरभंगा, बिहार।