Navratri Special : काशी में इस दुर्गा मंदिर के शिखर से कभी निकलने लगा था खून, जानें क्यों !

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9th October, 2018, Edited by Focus24 team

वाराणसी सिटी। नवरात्रि आदि शक्ति की उपासना का पर्व है, प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नवग्रह, नवनिद्धि, नौ शक्तियों की नवधा का पर्व है नवरात्र, जीवन से जुड़े नवरंग को को निखरता है नवरात्र पर्व । नवरात्र पर्व में आदिशक्ति के नौ रूपों कि नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा को दर्शाता है । जीवन को अगर नौ हिस्सों में विभाजित किया जाए तो जीवन के नवरंग का निर्माण होता है। इन्ही नवरंग को दर्शाता है नवरात्री का पर्व। मां कि कोख से जन्म लेने के उपरांत पंचमहाभूतों के यथार्थ में सामने तक का सफर ही जीवनी के नवरंग हैं।

बालपन से लेकर मरनोपरांत तक जीवन के नवरंग इस प्रकृति का ही हिस्सा हैं। ये जीवन की अवस्थाएं हम सभी के जीवन में आती ही हैं तथा हर अवस्था से संबंधित रहते हैं नवग्रह। इसी भांति नवरात्र के नौ रातें जीवन के नौ पड़ाव हैं जिनका संबंध हर एक अलग-अलग ग्रह से है।  नवरात्र के नौ दिन काशी में नौ देवियों की पूजा का प्रावधान है। जिनकी पूजा के लिए जगह – जगह काशी के मंदिरों में लोगों की भीड़ इकठ्ठा होती है। इन्हीं मंदिरों में से एक है, रामनगर स्थित दुर्गा मंदिर। यह काशी का अत्यन्त प्राचीन मंदिर है, तथा नवरात्र में यहाँ बहुत भीड़ होती है।

अंग्रेजों के ज़माने से है यह मंदिर

इस मंदिर की स्थापना विवादस्पद है। परन्तु यहाँ के कुछ लोगों के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना भूतपूर्व काशीनरेश ने कराई थी। यह मंदिर काशी के किनारे बसा है। तथा यह 6 बिस्वा जमीन में फैला है। चूँकि इसका निर्माण ब्रिटिश शासन के समय काशी नरेश ने कराया था, इसलिए इसकी गिनती काशी नरेश के संपत्तियों में से एक में होती है।

नक्काशी है शानदार

इस मंदिर की नक्काशी शानदार है, यह इसे देखते ही पता लग जाता है। मंदिर की दीवारों पर बनी आकृतियाँ स्थापत्य कला का नमूना है।

एक ही पत्थर से हुआ है निर्माण

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण में केवल एक ही तरह के पत्थर का प्रयोग किया गया है। 

कुंड में स्नान करने से मिलता है मोक्ष

मंदिर के बाहर बहुत ही विशाल कुंड (तालाब) है। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से मनुष्य पाप मुक्त हो जाते हैं तथा उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहाँ के कुछ स्थानीय लोगों के अनुसार, इस कुंड का निर्माण भगवान श्री राम ने कराया था, परन्तु इसका कोई लिखित प्रमाण अभी तक उपलब्ध नहीं है।

शिखर से निकलने लगा था खून

इस मंदिर के अस्तित्व की परीक्षा लेने के लिए एक अंग्रेज अधिकारी ने इसके शिखर पर तीन गोली चलाई थी। इस दौरान मंदिर के शिखर से खून निकलने लगा था।