Valentine day Special... मैं फिर भी तुमको चाहूँगा...

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8th February, 2019, Edited by Shikha singh

फीचर्स डेस्क। पिया कहाँ हो यार ? और हाँ मुझसे झूठ मत बोलना... तुम अभी तक घर पर ही हो ना मैं पिछले एक घन्टे से बेवकूफों की तरह यहाँ हाथों में गुलाब लिए खड़ा हूँ...और तुम।

" प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़ व्योम..

मुझसे नाराज मत होना मैं बस घर से निकल ही रहीं हूँ।

बस निकल रही हो क्या मतलब ? अभी और घन्टे लगाने का इरादा है क्या? मैं यहाँ धूप में खड़ा खड़ा पापड़ की तरह सूख गया पर तुम्हें क्या ..तुम्हें तो फरक पड़ेगा नहीं।

अरे बाबा अब नाराज मत होना ना अपनी गलती नहीं देख रहे हो कल हमारी मेहंदी है और तुम्हें रोज डे की पड़ी है घर मेहमानों से भरा पड़ा है तुम्हीं बताओ कैसे आऊँ मैं घर से बाहर ..." " हाँ तो मत आओ तुम पर एक बात सुन लो मैं भी यहाँ धूप में ही खड़ा रहूँगा।

फिर शादी वाले दिन सब तुमको चिढ़ायेगें...

अरे देखो देखो पिया का दूल्हा तो बिल्कुल कोयले जैसा काला है। कोई बात नहीं कहने दो दुनिया को मैं फिर भी तुमको चाहूँगी... समझे जी अच्छा फोन रखों मैनें चुपके से अपनी स्कूटी बाहर निकाल ली है बस बीस मिनट में तुम्हारे सामने होगी... फिर आज ही मना लेना रोज डे परपोज डे मैं कल नहीं आऊँगी अकेले मिलने।

अरे मत आना ..कल हम आ जायेगे ..वैसे भी सिर्फ कल ही की तो बात है फिर तो हम हर दिन साथ में मनायेगें...अच्छा जल्दी आओ मैं तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ। पिया को जल्दी आने का बोल व्योम इन्तजार की घड़ियों से जद्दोजहद करने लग गया...पता नहीं यह इन्तजार और वक्त की हरदम ठनी क्यों रहती है।

जब किसी का इन्तजार हो तो वक्त गुजरता ही नहीं है... धीरे धीरे इन्तजार के पल जानलेवा होते जा रहे थे और पिया का कुछ अता पता ही नहीं था... तभी अचानक व्योम के नम्बर पर पिया कालिंग फ्लैश होने लगा..। व्योम ने बेकरारी से फोन उठाया और गुस्से से बोला ... " कहाँ हो तुम पिया ..ऐसा करों अब कभी मत आना।

मैं तुमसे बहुत नाराज हूँ..."

तभी एक अजनबी आवाज ने व्योम को पाताल में धकेल दिया... " सुनिये यह जिनका भी फोन है एक बच्चे को बचाने के चक्कर में वो खुद बस के नीचे आ गयी है। हम इन्हें सिटी हास्पिटल ले जा रहे है .. आप भी वहीं आ जाये।

खबर सुन कर व्योम को काटो तो खून नहीं वाला हाल था ...वो बिजली की तेजी से सिटी हास्पिटल पहुँचा था। पिया आई सी यू में थी। थोड़ी देर में डॉक्टर बाहर आयी और व्योम से बोली। "अब वो खतरे से बाहर है पर उनके चेहरे और शरीर पर बहुत ज्यादा चोटें आयी है। प्लास्टिक सर्जरी से भी शायद अब वो कभी पहले जैसी नहीं हो सकती। आप थोड़ी देर में मरीज से मिल सकते है ।" व्योम थके कदमों से पिया की तरफ बढ़ा था। अन्दर पिया पट्टियों से जकड़ी पड़ी थी।

थोड़ी थोड़ी होश में आती पिया की आँखों में व्योम को खो देने का डर साफ झलक रहा था। पिया की आँखों की परिभाषा को पढ़ता हुआ व्योम धीरे से पिया के सिरहाने जा बैठा और उसके माथे पर सहलाते हुए बोला। तुमने अपने प्यार को इतना कमजोर कैसे समझ लिया पिया। मैं तुम्हारे शरीर से नहीं तुमसे प्यार करता हूँ तुम चाहे जैसी भी हो चिन्ता मत करना मैं फिर भी तुमको चाहूँगा और हाँ जो हुआ उसे बुरा सपना समझ कर भूल जाना।

समझी पागल...हैप्पी रोज डे ..यह कहते हुए व्योम ने लाल गुलाब पिया के सिरहाने रख दिया। ...गुलाब की खूशबू के साथ अब दोनों की आँखे भी झिलमिला रही थी।

कंटेंट सोर्स : नेहा अग्रवाल “नेह" लखनऊ सिटी।