मैजिक फ्रूट 

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20th June, 2019, Edited by manish shukla

फीचर्स डेस्क। बार बार बेटे और बहू को देखकर सुषमा जी की आँखें छलछला जा रही थी ,आज दोपहर घन्टी बजने पर जब उन्होंने दरवाजा खोला ,तो उन्हें अपनी आँखो पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। आने वालों ने अपना सामान अन्दर लाकर रखा। तभी शर्मा जी अपना चश्मा साफ करते हुये बाहर आ गये। वो भी हैरानी की इन्तहा पर थे। तभी सुषमा जी चहकते हुये बोली। " सुनिए जी जरा मुझे चुटकी तो काटिये जरा , मैं कहीं सपना तो नहीं देख रही हूँ ना।"

सुषमा जी की बात सुनकर बहु मुस्कुराते हुए बोली।

नहीं माँजी हम आपको सरप्राइज देना चाहते थे, बस इसलिये नहीं बताया।

बहु की बात सुनकर सुषमा जी नकली गुस्से से बोली।

"मुझे मक्खन लगाने का कोई फायदा नहीं है बहु, पूरे चार साल बाद तुम लोग विदेश से वापस आये हो। आज जाकर मैं अपने पोते को छू पा रही हूँ। अब तक तो बस विडियों कॉल पर ही देखकर कलेजा ठंडा कर लेती थी या फिर तस्वीरों से काम चला लेती थी।"

माँ को इमोशनल होता देखकर बेटा बात बदलते हुये बोला ।,

" अच्छा पापा उस जामुन के पेड़ का क्या हाल है, जिसपर मैं अपनी पूरी दोपहर गुजार दिया करता था।"

बेटे की बात सुनकर शर्मा जी जोश में आ गये और बोले।

" अरे बेटा उस पर तो इस बार भी बहुत मीठे फल आये है ,रूक मैं अभी डलिया भर कर लाता हूँ ।"

और शर्मा जी पलक झपकते ही मीठे रसीले जामुनों के साथ वापस आ गये थे।

जैसे ही उन्होंने जामुन अपने पोते शिवाय को दिये। वो मुहँ बिचकाते हुये बोला।

" नहीं दादू मुझे यह नहीं खाने है ,इनका तो कलर ही अच्छा नहीं है और खूशबू भी अच्छी नहीं है।" 

पोते की बात सुनकर दादू का चेहरा उतर गया। फिर दादीमाँ और मम्मी ने भी बहुत कोशिश की पर शिवाय जामुन खाने को तैयार नहीं हुआ।

तभी शिवाय के दादू उसे गोदी में बिठा कर बोले।

" जानते हो शिवाय यह मैजिक फ्रूट होता है।"

" मैजिक फ्रूट वो कैसे दादू "शिवाय हैरानी से बोला।

" हाँ बेटा ,अच्छा बताओ ???अभी मेरी जीभ का कलर क्या है "

" दादू आपकी जीभ तो पिंक कलर की है।"

"हाँ जी पिंक है ना बेटा , अब देखो मैं एक जादूई मंत्र बोलूंगा।और फिर यह फल खाउंगा और मेरी जीभ पिंक से पर्पल हो जायेगी।"

" क्या सच में दादू ????" शिवाय हैरान होता हुआ बोला।

" हाँ बेटा जी " 

यह कहते हुये शिवाय के दादू ने मंत्र बोला ।

" आबरा का डाबरा गिल्ली गिल्ली छू "

और उन्होंने जामुन खा लिया ।

दो तीन जामुन खाते ही उन्होनें अपनी जीभ शिवाय को दिखा दी ।

शिवाय यह देख कर हैरान हो गया और खुशी से नाचने लगा ....

एक तरफ शिवाय की खुशी देखने लायक थी तो दूसरी तरफ शिवाय के दादू और दादी भी बहुत भावुक हो गये थे ....

सुषमा जी ने भी अलादीन के जीन जैसे फटाफट बहुत सारे मजे मजे के खाने सबके लिए मेज पर सजा दिये....

सब बहुत खुश थे पर सुषमा जी की आँखें बार बार भर आ रही थी ....जो शर्मा जी की आँखों से छुपा नहीं था...

" सुषमा जी जरा रसोई में आना "

...यह कहते हुए शर्मा जी रसोई की तरफ बढ़ गये ....सुषमा जी के रसोई में आते ही शर्मा जी बोले ....

" रोज तुम्हारी आँखों से बेटे की याद में सावन भादो बरसते ...समझ आते है पर आज ...आज क्यों तुम्हारी पलकें भीगी भीगी है ..."

" क्या करूँ देखों ना बच्चों के आ जाने से मुर्दा घर में जान आ गयी है ...अब पता नहीं कित्ते दिन के लिए आये है ...इनके जाने के बाद हम फिर तन्हा रह जायेगें..."

शर्मा जी कुछ बोलते इससे पहले ही उनका बेटा आकर बोला...

" अब ऐसा नहीं होगा माँ ....डॉलर तो बहुत कमा लिये ,अब सुकून भी कमाना है ...और शिवाय को भी रोज अपने दादू से मैजिक फ्रूट का मैजिक देखना है ....इसलिए हम अब हमेशा के लिए वापस आ गये है ...."

बेटे की बात पर जहाँ शर्मा जी और उनकी वाइफ की आँखों में सुकून उतर आया...वही बेटे की आँखों के सामने अपने फूट फूट के रोते दोस्त का चेहरा आ गया था ...जिसे अपनी माँ की मरने की खबर छः महीने बाद मिली थी जब वो अपने फ्लैट में कंकाल बन गयी थी...

कंटेंट सोर्स : नेहा अग्रवाल "नेह ", लखनऊ सिटी.