Valentine Special... किसी की दस्तक कराती है आपको प्यार का एहसास... हैप्पी वेलेंटाइन डे

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14th February, 2017 - 11:12 AM, Edited by

नई दिल्ली।  आज के इस दौर में अगर कोई बिना इज़ाज्त घर में आ जाए, तो सबसे पहला सवाल हम यही करते है.... कि तमीज शब्द का मतलब जानते हो.....वहीं दूसरी तरफ गालिब से लेकर शाहिर तक हर किसी ने यहीं कहां है, कि प्यार कभी किसी की इजाज्त लेकर जिंदगी में दस्तक नहीं देता....ये ढ़ाई शब्दों से बना शब्द जिंदगी में बिना पूछे आता है और या तो जिंदगी का मतलब सिखा जाता है, या फिर सबक....

प्यार की राह पर चली हूं...और चलती ही रहूंगी....

या तो एक दिन तुम से मिलुंगी.... या फिर मुसाफिर बन जाउंगी....

ये तो हुई वो बातें जो अक्सर प्यार होने और ना होने के दायरे को तय करती है...प्यार के किस्से एक सदी से चले आ रहे है। प्यार उस वक्त में भी हुआ करता था, जब कि लड़कियां घर से बाहर तक नहीं निकलती थी। तब एक नज़़र में प्यार इश्क और  मौहब्बत के  किस्से परवान चढ़ जाया करते थे। उस  दौर में भी आशिक अपनी आशकी में जान तक दे देते थे, और किसी राजा को  अगर प्यार हो जाएं तो वो उसे पाने के लिए  हमला कर राज्य को ही अपने अधीन कर लेता था।

आज हम इतिहास में मनाए गए पहले वेलेंटाइन के बारें में बात करते है, सुनने में अजीब है, पर किस्सा भी गजब है जनाब...

यह एक ऐतिहासिक दावा है और मानने वाला का कहना है कि पहली बार वेलेंटाइन इंग्लैड़ के राजा रिचर्ड और इनकी पत्नी बोहेनिया की ऐन की सगांई की पहली वर्षगांठ को मनाया। 8 महीनें बाद साल 1381 में उन दोनों की शादी के लिए एक बेहद बड़ी संधि पर हस्ताक्षर के साथ ही विवाह के प्रस्ताव को दोनों परिवारों ने स्वीकार किया था, उस दौरान दोनों की उम्र भी करीब 14 साल की ही थी। उस समय सगाई के बाद हुए प्यार की यह पहली दास्तान थी जो इस तारिख के साथ जुड़ी थी।

ये वो इतिहास है जो कुछ इतिहासकारों ने बयां किया है, एक कहानी आज के दौर की जो बेह मार्मिक और खुबसुरत है।

ये कहानी रमन और अन्नया की है, दो दोस्त जो एक साथ बड़े हुए, पढ़े-लिखे, जिंदगी के हर पल में एक साथ रहे। पर दोनों के बीच प्यार का एहसास अब तक ना था। 12वीं पास करने के बाद दोनों ने दिल्ली के रामजस कॉलेज में दाखिला लिया। स्कूल तक दोनों की दोस्ती का दायरा एक-दूसरे तक ही सीमित था। रमन और अन्नया को कभी किसी तीसरे  की जरूरत ही महसूस ना होती...लेकिन क़ॉलेज में बढ़ते और खुलेपन के साथ दोनों की दोस्ती में अब तिकड़ी बन जाती है। अब रमन, अन्नया की दोस्ती में अमन का नाम भी जुड़ जाता है।

बितते वक्त के साथ अमन की हर बात अन्नया को भाने लगती है, या फिर यूं कहूं कि अन्नया ने पहली बार रमन से नज़़रे हटाकर किसी लड़के की तरफ ध्यान देना शुरू किया था। अब अन्नया का कॉलेज आना और छुट्टी दोनों अमन के कॉलेज आने पर निर्भर होना लगा था...कहीं ना कहां यह सब रमन को अब चुभने लगा था, लेकिन दोनों ने कभी भी नहीं माना था कि दोनों एक दूसरें से प्यार करते है...तो कुछ कह भी नहीं पा रहा था रमन...

कॉलेज का पहला साल खत्म होने के पहले वेलंटाइन पर ही अमन ने अन्नया को अपने पहले वेलंटिन की प्रोमनाइट पर चलने के लिए इन्वाइट कर दिया, पहले से अमन के लिए प्यार के भाव लिए बैठी अन्नया ने बिना कुछ सोचे ही अमन की प्रोमनाइट बनने का इंवीटेशन स्वीकार कर लिया। यहीं इंवीटेशन रमन और अन्नया की जिंदगी के बीच दूरी की पहली वजह बना... अब रमन अन्नया से दूर रहने लगा।

अनम के प्यार में गुम अन्नया को इस बात का एहसास पहली बार तब तक हुआ, जब उसने रमन को एक दिन एक लड़की के साथ बैठे देखा। अमन ने अन्नया का हाथ पकड़ रखा था, लेकिन अन्नया को उसके प्यार के स्पर्श से ज्यादा रमन से उसकी दूरी का एहसास सताने लगा। अनम से अपना हाथ छुड़ा अन्नया एकाएक रमन के पास जा बैठी, और बोली न्यू फैंड....मुझसे नहीं मिलाओंगे....

रमन ने जैसे ही कहा हहहमममम...फैंड नहीं गर्लफैड़ है मेरी....उसके बाद अन्नया बिना कोई सवाल किए बस अब रमन की बातें सुन रही थीं..अब रमन भी बस अपनी गर्लफैंड़ रोशनी के बारे में ही बताता रहा....

कुछ समय बिता एक रात दोनों की मुताकात फिर से एक दोस्त के यहां 14 फरवरी की नाइट आउट की पार्टी में हुई...उस दौरान अन्नया ने पहली बार अपने रमन को खुद से इतना दूर और किसी और के इतना करीब देखा....बस फिर अन्नया ने आव देखा ना अमन...और अपने हाथ कि अंगूठी उतार रमन से कहा विल यू बी लाइफ टाइम वेलंनटाइन

ये है मिस्टर रमन शर्मा और मिसेज अन्नया शर्मा की कहानी.....अगर आप को किसी से प्यार है, तो इस तरह से किसी दस्तक का इंतजार क्यों....प्यार का एहसास वो होता है, जिसमें आप किसी के बिना रह नहीं पाते, और उसकी दुनिया में किसी और की दस्तक... आपके उस दौर की चुभन बन जाती है।

                                          ................. हैप्पी वेलेंटाइन डे अकंल एंड आंटी