इस भारतीय मुसलमान पर पूरे देश को आखिर क्यों हो रहा है गर्व

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18th August, 2019, Edited by manish shukla

अमरीश मनीश शुक्ल
स्पेशल स्टोरी : सोशल मीडिया से लेकर न्यूज पेपर, इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया पर आज सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है। वह नाम है सैयद अकबरुद्दीन का। यह एक ऐसा नाम है जिसे पहले हर भारतीय भले ही ना जानता रहा हो, लेकिन अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठके बाद प्रेस कांफ्रेस में उन्होंने जिस तरह से पाकिस्तान की बखिया उधेड़ी उसके बाद से पूरा हिंदुस्तान इन्हें सलाम कर रहा है। 

दरअसल  जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बंद कमरे में अनौपचारिक हुई। इस बैठक में पाकिस्तान के आका चीन ने पाकिस्तान का बखूबी साथ दिया और भारत को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोडी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की इस बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने पहले जबरजस्त  कूटनीतिक कौशल दिखाया और जब प्रेस कांफ्रेस हुई तो पाकिस्तानी पत्रकारों की बोलती बंद कर दी। अकबरुद्दीन ने प्रेस कांफ्रेंस में पाकिस्तानी पत्रकारों से हाथ मिलाने लेकर जिस मिलनसार व हाजिर जवाबी से पूरी ​दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखा, वह देखकर हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से उंचा और सीना फक्र से चौडा हो गया। 

क्या हुआ था प्रेस कांफ्रेंस में 

यूएनएससी की एक घंटे चली बैठक में पाकिस्तान और चीन की जग हंसाई के बाद जब प्रेस कांफ्रेंस हुई तो इन दोनों देशों के राजदूत मुंह छिपाकर भागते नजर आये।  चीन के राजदूत झांग जुन और पाकिस्तानी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने अपना बयान तक नहीं पढ़ा और मीडिया के सवालों का जवाब न देना पडे इसलिये भाग खड़े हुये। यूएनएससी बैठक के बाद चीन-पाक के प्रतिनिधियों का मैदान छोड़ना उसकी हताश के साथ जग हंसाई भी करा रहा था। लेकिन इन सबके बीच भारतीय प्रतिनिधि का डट कर सामने आना बेहद ही सुखद अनुभव वाला रहा। पाकिस्तान व चीन के प्रतिनिधि के दुम दबाकर भागने के बाद तीसरे नंबर पर जब भारत के प्रतिनिधि का नंबर आया तो प्रेस कांफ्रेंस के मंच पर अकबरुद्दीन आए और भारत का रुख पूरी दुनिया के सामने रखा। 

इस तरह की शुरूआत 

भारतीयता की मिसाल पेश करने वाले भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने राजनेताओं की तरह विनोदप्रिय और मिलनसार रूप के शांत शांत, सौम्य और गरिमापूर्ण छवि धारण कर पत्रकारों से कहा, कि अगर आपमें से कोई सवाल पूछना चाहता है तो एक सच्चे लोकतंत्र का प्रतिनिधि होने के नाते मैं तैयार हूं। मैं यहां आए अपने दोनों पूर्ववर्तियों यानी पाकिस्तान व चीन से पांच गुना ज्यादा सवालों के जवाब दूंगा।

पाकिस्तानी पत्रकार की बोलती बंद 

सैयद अकबरुद्दीन ने सबसे पहले सावा पूछने का मौका पाकिस्तान के पत्रकार को दिया तब एक वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार ने पूछा, ‘आप पाक के साथ बातचीत कब शुरू करेंगे?’ 

इस सवाल के जवाब पर सबको उम्मीद थी कि अकबरुद्दीन अन्य राजनायिकों की तरह कोई घिसा पिटा जवाब देंगे। लेकिन यहां पर अकबरुद्दीन ने एक नया ट्रेंड शुरू करते ऐसा कदम उठाया जो पूरी दुनिया के लिया मिशाल बन गया। दरअसल अकबरुद्दीन अपने मंच से उतर गये और बोले  ‘आपके पास आकर मुझे ही इसकी शुरुआत करने दीजिए।

अकबरुद्दीन मंच से उतरकर सीधा पाकिस्तानी पत्रकारों के पास पहुंचे और मुस्कराते हुए उनसे हाथ मिलाया। अकबरुद्दीन ने कहा कि ‘हम यह कहकर पहले ही दोस्ती का हाथ बढ़ा चुके हैं कि हम शिमला समझौते पर प्रतिबद्ध हैं। अब पाक की ओर से जवाब का इंतजार है।

दूसरा सवाल जब आया तो 

पाकिस्तानी पत्रकार के पहले सवाल में ही अकबरुद्दीन ने ऐसा कुछ कर दिया था कि पूरा पाकिसतान और विदेश मंत्री खिसियाहट से भर गये थे। तभी एक दूसरे पाकिस्तानी पत्रकार ने पूछा —  ‘पड़ोसियों के बीच कोई संवाद क्यों नहीं है? भारत ने वार्ता के अनुरोध का कोई जवाब क्यों नहीं दिया?

पत्रकार के इस सवाल को अकबरुद्दीन पूरी तरह से भांप गये कि वह किस मामले को कहां पर घेरने की कोशिश कर रहा है। इस अकबरुद्दीन ने साफ लहजे में पूरी दुनिया की मीडिया की ओर मुखतिब होते हुये कहा कि  — वार्ता शुरू करने के लिए पहले आतंकवाद को रोकिये। अकबरुद्दीन  ने अपने उत्तर को विस्तार देते हुये कहा कि जब देश आपस में बात करते हैं तो उसका सामान्य कूटनीतिक तरीका होता है, लेकिन सामान्य देश अपना मकसद हासिल करने के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल नहीं करते। उन्होंने शख्त लहजे में पाकिस्तान सरकार को संदेश दिया कि जब आतंकवाद फलफूल रहा हो तो कोई भी लोकतांत्रिक देश वार्ता के लिए तैयार नहीं होगा।

पाकिस्तान का दर्द भी कुरेद दिया 

अगले कुछ पलों तक अकबरुद्दीन हवा में बात नहीं कर रहे थे और ना ही उन्हें इसके लिये कोई अलग से स्पीच लिखकर उसके अनुसार बोलने की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने प्रेस कांफ्रेस के सहारे पूरी दुनिया में पाकिस्तान की पोल खोलते हुये बताया कि ‘वह खुद इस्लामाबाद गए है और कयी कई प्रतिनिधिमंडलों का सदस्य रहे हैं। अकबरुद्दीन ने कहा कि मैं खुद इस्लामाबाद में भारतीय राजनयिक के तौर पर काम कर चुका हूं और वहां के हालात और उद्देश्य से वाकिफ हूं। गौरतलब है कि पाकिस्तान खुद ही अपने आतंकवाद का शिकार होता रहा है और वही बात इशारों में अकबरुद्दीन ने कुरेद दी थी। जिसका रिएक्शन पाकिस्तानी विदेश मंत्री के चेहरे से लेकर पाकिस्तानी पत्रकारों पर भी देखने को मिलला। 

हाजिर जबाबी का कायल हुआ देश 

प्रेस वर्ता के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा कि अनुच्छेद 370 भारत का अंदरूनी मसला हो सकता है.....लेकिन इतने शब्दों पर ही अकबरुद्दीन ने पत्रकारों को रोक लिया और अपनी हाजिर जवाबी से कहा कि — यह मानने के लिये धन्यवाद । अकबरुद्दीन की इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद किसी को नहीं थी और यह देखकर भारतीय पत्रकारों से लेकर दुनिया भर के मीडिया कर्मी भी मुस्कुरा उठे, हालांकि पाकिस्तानी पत्रकार इससे एक बार तो झेप गया लेकिन अपना सवाल आगे जारी रखते हुये उसने अगे पूछा कि — अनुच्छेद 370 को भारतीय संविधान में प्रतिष्ठापित किया गया था.....लेकिन इतनी ही शब्द आगे पत्रकार बोल पाया था कि एक बार फिर से अकबरुद्दीन ने अपनी हाजिर जवाबी का एक और नमूना पेश किया और धन्यवाद आपने भारत द्वारा इसे प्रतिष्ठापित माना। 

पत्रकार की बोलती कर दी बंद 

पाकिस्तानी पत्रकार ने अकबरुद्दीन से पूछा कि कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंध सच्चे लोकतंत्र के रूप में भारत की छवि को धूमिल करते हैं ? इस पर क्या कहेंगे आप। 

अकबरुद्दीन इस तरह के सवाल को पहले ही एक्सेप्ट कर रहे थे और यहां उन्होंने बेहद ही शानदार तरीके से पाकिस्तानी पत्रकार की बोलती बंद करते हुये कहा कि लोकतंत्र की समृद्धि के लिए सबसे अधिक आवश्यक लोक व्यवस्था होती है। लोक व्यवस्था के बिना लोकतंत्र कार्य नहीं कर सकता, हम उसी लोक व्यवस्था का कार्य कर रहे हैं। वहां कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं, यह सही है और हम इसे स्वीकार भी करते हैं । लेकिन अब प्रतिबंधों में ढील देने का क्रम जारी है और काफी अधिक स्तर पर ढील दी जा चुकी है। अधिकांश स्थानों पर बाजार, स्कूल सब खुल चुके हैं और जन जीवन सामान्य है।

हालांकि अकबरूद्दीन के उत्तरों को देखकर फिर आगे किसी पाकिस्तानी पत्रकार की सवाल पूछने की हिम्मत नहीं पड़ी और यह पूरा घटना क्रम अब मीडिया में छाया हुआ है और पूरा देश एक भारतीय मुसलमान की भारतीय को गर्व के साथ महसूस कर रहा है। 

 

परिचय 
सैयद अकबरूद्दीन न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत/स्थायी प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त हैं। वे भारतीय विदेश सेवा के वर्ष 1985 बैच के अधिकारी हैं तथा उन्होने इस पद पर अशोक मुखर्जी का स्थान लिया है। इससे पूर्व वे भारतीय विदेश मंत्रालय में अपर सचिव थे।