विभिन्न रूपों से खूब सजी शाम, हर कविता अलग पहचान लिये अपने आप में बेमिसाल

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3rd October, 2019, Edited by Shivangi Agarwal

सिलीगुड़ी सिटी। माटीगाढ़ा स्थित उत्तरायण टाउनशिप परिसर में रविवार को महिला काव्य मंच सिलीगुड़ी शाखा का उद्घाटन व कार्यकारिणी का गठन महिला काव्य मंच पश्चिम बंगाल ईकाई की अध्यक्षा आरती सिंह के नेतृत्व में हुआ। इस दौरान कवयित्री किरण अग्रवाल के निवास पर गुरु कृपा और माँ दुर्गा की स्तुति के साथ "नवरात्रि" पर केंद्रित कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया। दार्जीलिंग व जलपाईगुड़ी जिला से 16 कवयित्रियों ने इसमें भाग लेकर नारी शक्ति और ओज से परिपूर्ण कविता की सुमधुर प्रस्तुति की।

बता दें कि आज की सभी कविता मौलिक और मां दुर्गा को समर्पित थी। कवयित्रियों की कविता ने नारी के हर रूप का व्याख्यान किया, जिससे माहौल कभी भक्तिमय तो कभी रौद्र रूप लिया। कविता में कभी माँ की ममता के रूप को नजर आया तो कभी एक प्रश्न कि अगर पूजन माँ का होता है तो वृद्धाआश्रम में माँ क्यों सिसकती है, अगर पूजन कन्या रूप का होता है, तो बेटी बोझ क्यों समझी जाती है वो लुटती क्यों है, घुटती क्यों है। विभिन्न प्रश्न विभिन्न रूपों से खूब सजी शाम। हर कविता अपनी अलग पहचान लिये हुए अपने आप में बेमिसाल थी।

कविता एक बच्चे की तरह होती है

इस सम्मेलन में पत्रकार मनु कृष्णा पत्रकारिता जगत के गिरते मूल्यों को रेखांकित करते हुए व्यंग्य किया- "हाँ मैं पत्रकार हूं गिरा हुआ बेकार हूँ। इस अवसर पर पत्रकार रीता दास को को सचिव नियुक्त किया गया। रीता दास की मधुर और सुरीली आवाज ने महौल में चार चाँद लगा दिये " मैं स्त्री हूँ/ इसलिए माद्दा है/ सात समुद्र लाँघने का/ और सात आसमां भेदने का" साथ ही उन्होंने कहा कि कविता एक बच्चे की तरह होती है। जिसे बहुत सहेज कर रखा जाता है और पाठ करने से पहले उसे आत्मसात किया जाता है। बालिका विद्यापीठ की प्रधानाचार्या अर्चना शर्मा ने भक्तिमय पंक्ति "शेर पर सवार होकर आई माता की सवारी/सुन लो माता ,सुन लो माता अर्जी एक हमारी।" इस गीत ने खूब तालियां बटोरी । डा राजेन्द्र प्रसाद स्कूल की वरिष्ठ शिक्षिका डॉ.वंदना गुप्ता जो कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार व अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन एथेंस में नये पाठक पुरस्कार से सम्मानित हुई है ने माँ पर कविता का पाठ किया उनकी कविता के ओज ने माहौल को एक न्ई उर्जा से भर दिया। बहुत ही मधुर और सुरिली आवाज की स्वामिनी सोनी केड़िया जी ने अपनी कविता की पंक्तियों "पाषाण बनी वो तुम कमजोर हो नर..तुमने अपनी ही माँ ,संगनी,सखी, बहन, बेटी को पाषाण सा बना" पंक्ति नारी की विविध भूमिका को कविता के माध्यम से दर्शाया। उषा की कविता उठते बैठते मैया तुझे पुकारे, कभी तो चमकेंगे तेरे नाम के सहारे ने हर बार की तरह अपॅई छाप छोड़ी।

जीवन के चक्र को,चलातीं हैं बेटियाँ

प्रथम बार सम्मेलन में उपस्थित कवयित्री रिंकी गुप्ता ने भी कविता से समा बांधा और पेशे से वकील रिंकी कुमारी ने अपने वक्तव्य से सबको एक विश्वास दिलाया कि वो हर वक्त मंच के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ी है। गजल गायिका बबीता कंवल जो कि राज्यपाल द्वारा शक्ति सम्मान से सम्मानित हुई है ने सम्मेलन का संचालन किया साथ ही उन्हें महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया। उन्होंने अपनी गजल और दोहे से समां बांधा जिनकी पंक्तियाँ थी "दिया जलाओं तम हटाओं, रौशनी घर घर फैलाओं"। उभरती हुई कवयित्री प्रियंका जयसवाल ने बेटी पर कविता सुना जिनकी पंक्तियाँ थी दुर्गापूजा में बेटियाँ "प्रसव पीड़ा को सहतीं, किसी से कुछ नहीं कहती,पर जीवन के चक्र को,चलातीं हैं बेटियाँ "। बेटी की इस भावविह्वल कविता ने सबका मन मोह लिया वहीं वीणा चौधरी जी की कविता "माँ अम्बे तू जगत जनी साँचा है तू " सुना माँ दुर्गा का मानो आह्वान किया , आदरणीय निशां गुप्ता जी ने अपनी कविता में कहा कि उन्हें "दुर्गा में अपनी माँ दिखती है", उनकी कविता "प्यार क्या होता है" ने मन में क्ई प्रशन छोड़े।

हर कण_कण में तू है...

नव कवयित्री किरण जी ने कविता के माध्यम से कहा "जब जब तुम नारी को चोट पहुंचाते हो मैं वही तो होती हूँ " , भेष बदल जब चालीसा पढते हो मैं वही तो होती हूँ " । उनकी ये कविता समाज को आइना दिखाती है कि देवी को पूजने वालों क्या तुम्हें नारी में मैं नजर नहीं आती जब तुम उन्हें पीटते हो जब उन्हें नोंचते हो? विषेश तौर पर जलपाईगुड़ी से सम्मेलन का हिस्सा बनने के लिए पधारी श्वेता अग्रवाल की कविता की पंक्तियाँ "तुम्हें क्या पता माँ बनने का सुख तुम्हें तो बस निशान नजर आते है " सच में एक मन को झंकृत करने वाले थे। लालबहादुर शास्त्री सम्मान व मोहनलाल जैन सम्मान से सम्मानित आदरणीय रूबी प्रसाद ने अपनी कविता की पंक्तियों " हर कण_कण में तू है माँ तो क्यों वृद्धाआश्रम में सिसकती है बूढ़ी माँ " भले दूर हो बेटियाँ पर आंसू बन गालों को चूमती है बेटियाँ " से समां को बांध लिया। बहुत ही खास दिन गांधी जयंती और दुर्गा पूजा के इस अवसर पर महिला काव्य मंच का उद्घाटन बहुत ही सफल रहा।

सदस्यों को अलग-अलग दिए गए पद भर

महिला काव्य मंच की राज्य अध्यक्षा के नेतृत्व में सिलीगुड़ी शाखा की कार्यकारिणी का गठन किया गया। संरक्षक अर्चना शर्मा, अध्यक्ष डॉ वन्दना गुप्ता, महासचिव बबिता अग्रवाल, सचीव रीता दास को दिया गया। इस इकाई की सभी सदस्यों को अलग-अलग पद भर दिए गए और अध्यक्षा आरती ने कहा कि पदभार से भी महत्वपूर्ण होता है संगठन और आपसी प्रेम, सहयोग और एक-दूसरे का सम्मान जो कि मंच को ऊंचाइयों पर ले जाता है। कार्यक्रम के अंत में किरण अग्रवाल ने सभी उपस्थित कवित्रीयों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इसकी जानकारी मीडिया प्रभारी महिला काव्य मंच, सिलीगुड़ी इकाई रूबी प्रसाद ने दी है।