धरती का स्वर्ग जिसने कश्मीर बता दिया, वह गदहा है.....

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11th August, 2019, Edited by manish shukla

सुभाष सिंह सुमन
कश्मीर के साथ हुए संसदीय क्रियाकलाप के बाद देख रहा हूं कि बहुत सारे लोगों के मरोड़ें जाग रहे हैं। पहले लोग सवाल उठाते रहे हैं कि ३७० को यह सरकार खत्म क्यों नहीं करती है। कई कथित बौद्धिकों ने इसे असंभव भी बता दिया था। उदारवादी खेमे के कुछ कथित बौद्धिक धमकाने भी लग गए थे कि यदि ३७० के साथ कुछ हुआ तो दंगे हो जाएंगे, कि हाथ लगाने वालों के हाथ जल जाएंगे। कई सारे लोग ३७० को लेकर इस सरकार का हास्य भी करते रहे। मैंने भी किया यह, मौके बेमौके।
       अब लोगों को इस बात से भी दिक्कत है कि इस सरकार ने सच में यह कर दिया। मजेदार बात है कि ऐसे भी लोग हास्य कर रहे हैं, जो इस सरकार को ऐसा कर देने पर चेतावनी दे रहे थे।
     एक वृहद विवादित बात हुई जमीन की। निश्चित ही जम्मू कश्मीर के अलावा भी कई राज्य हैं, जहां बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते। सिक्किम, मेरी प्रिय जगह, इस अगस्त में बहुत याद आती है। इस सिक्किम में भी बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते।
   मैंने अपनी पिछली सिक्किम यात्रा के बाद लिखा था कि धरती का स्वर्ग जिसने कश्मीर बता दिया, वह गदहा है। असल स्वर्ग सिक्किम है। सिक्किम स्वर्ग है क्योंकि सिक्किम ने हिमालय के श्वेत शिखरों पर खून नहीं बहाया कभी। सिक्किम ने हिमालय को गिरिराज होने का मान दिया है। सिक्किम की जनसांख्यिकी भारतीय संस्कृति की प्रतिनिधि बनी हुई है। कश्मीर के साथ यह बात नहीं है। यहां एक स्याह सच लिख रहा हूं, कश्मीर जो आज से तीस साल पहले था, वह रह नहीं गया है। जनसांख्यिकी मने डेमोग्राफी बदल गई है। अभी जो कश्मीरियत गा रहे हैं, उनकी नस्ल जांचने की जरूरत है। बहुतेरे अफगानी नस्ल के मिलेंगे। इस बारे में मिलिट्री रिपोर्ट में भी कई बार कहा गया है। पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों ने, जिन्हें हमारी मिलिट्री बाहरी आतंकवादी बताती है, उन्होंने बम फोड़ने के साथ में स्थानीय कश्मीरी लड़कियों का बलात्कार कर बच्चे पैदा किए। यह एक या दो दिन नहीं हुआ बल्कि दशकों हुआ। मजेदार कि कथित बौद्धिकों की इसपर चूं न निकली। इतिहास इसकी व्याख्या जरूर करेगा।
     यह स्थिति किसी भी अन्य ऐसे राज्य के साथ नहीं है। कहीं भी पूरे राज्य की डेमोग्राफी को इस तरह से, मने बौद्धिकों के समर्थन सहित सामूहिक बलात्कार से बदला नहीं गया है। यही कारण है कि जम्मू कश्मीर में हर उस योग्य और समृद्ध इंसान को संपत्ति खरीदने का मौका दिया जाना ऐतिहासिक है। यह सबसे शानदार काम हुआ है। लोग इसपर ट्रॉल भी बन रहे हैं, वही लोग जो ट्रॉल संस्कृति को बुरा बताने में करियर खर्च भी कर रहे और बना भी रहे।
    मुझे हैरानी होती है कि यदा कदा किसी विदेशी दार्शनिक को कोट करके उदारवाद के नाम पर चरमपंथ का रास्ता अपना लेने वाले लोग खुद को अपनी शक्ल दिखा कैसे पाते हैं? मुझे शक है कि वाल्टेयर को कोट करने वाले लोग उसको पढ़े भी हैं। यदि कोई हो, जिसने Voltaire के आगे लिबरल फिलासफी में विल किमिलिका, एरिक हॉब्सबॉम आदि को भी पढ़ा हो, मुझसे बहस सकता है। यदि आप फर्जी के कट-कॉपी-पेस्ट वाले बौद्धिक हैं, हम अग्रिम क्षमा आवेदित करते हैं।

लेखक
सुभाष सिंह सुमन
स्वतंत्र लेखक