पार्ट 2 : स्मित हास्य से तुम..

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31st January, 2019, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क।  आज नींद जल्दी खुल गई सुबह के लगभग 6 बजे है।सुबह अभी भी निशा के आगोश में ही है। सर्द मौसम का असर है। इक्का दुक्का शुनक (श्वान) भौंक रहे है फितरत है आहट से  सतर्क होने की   यह भी एक इनका अपना गुणधर्म है। विपदाओं को भाँपने की अनुपम शैली   नासिका यंत्र का अतुलनीय उपयोग और मनुष्य नाक का इस्तेमाल सिर्फ दंभ के लिए अंजाम ढ़ेरों झमेले विडंबना खैर, शाल ओढ़े आज हल्के से कोहरें में निकल पड़ी हूँ। यूँ ही सुबह की सर्द अलसाई हवा अच्छी लग रही है। तुम्हारे सामने से गुज़री हूँ, पक्षी अलग ही राग छेड़ रहे और तुम उनका साथ मस्ती से झूमते दे रहे हो। नीली सी सुबह तुम्हारे होने का आभास दिला रही है तुम्हारी पत्तियाँ चाँदी सी चमक जो रही है। 

शांत स्थिर से तुम वैसे ही अड़िग रहते हो, किसी मौसम का असर नही ठंड का असर नही, वही स्थिरता, गर्मियों में वही दृढ़ता, बारिश में अलग दमक अपने वृक्ष होने का पूरा दबदबा कायम रखते हो एक मजबूती का अहसास। अक्सर तुमसे सिख लेती हूँ झुकना नही, हारना नही,क्योंकि इंसानी फितरत है जो आपको दौड़ा कर भी हरा नही सकता वह आपको तोड़ क्र हराने की कोशिश करता है। कई बार ऐसा होता है हम मनुष्य हारते है काश तुमसे सीखते कुछ। देखती हूँ गर्मियों मे तुम मुरझा जाते हो पर शाम होते हीअपने वास्तविकता में लौट आते हो, कुछ मौसम तुम्हे ठूँठ बना देते है। पर अपने गुण धर्म से तुम फिर हरीतिमा पा लेते हो, हारते नही अपनाते हो आत्मसात कर लेते हो खुद को दूसरे माहौल या परिस्थितियों से।हम मनुष्य जल्दी घबरा जाते है और डरते है खामखाँ उन लोगो से जो हमारी तरह की कृतियाँ है।याने एक दूसरे से,सोचती हूँ क्यों??

 शायद हमरा डर हमारी कमजोरी वह जान लेते है और हावी हो जाते है हमपर सच कहूँ तो वापसी मे यही तय कर रही हूँ खुद से लडो और अपनी कमज़ोरियों पर जीत हासिल करो। हम अड़िग रहेंगे तो हमे कोई हरा नही पाएगा।खुद को मजबूत बनाओ तो बात बने

वह पंक्तिया याद आरही है

 पोछ कर अश्क अपनी आँखों से

मुस्कुराओ तो कोई बात बने।।

सर झुकाने से कुछ नही हासिल

सर उठाओ तो कोई बात बने।।

 सुनो आज चाय कुछ ज्यादा ही मिठी पिने का मन है इतना तो बनता है गरमा गर्म मिठी अदरक की चाय और 7बजे की हल्की  गुनगुनी सुनहरी धुप,वाह्।।

स्वरा” सुरेखा अग्रवाल, लखनऊ सिटी।