father's day special : ताईजी ने कहा- माफ कीजिये इस बार भी लड़की हुई है...

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16th June, 2019, Edited by Shivangi Agarwal

ओहो पापा ...ना ना दोस्त...ना ना

पथप्रदर्शक....ना ना

मेरे दिल की धड़कन...ना ना

मेरा सारा जीवन...ना ना

मेरी सफलता का आसमान....

कई नाम पर एक पहचान कहलाते वो मेरे भगवान...

सरल स्वभाव, दिलेर, दयालू, जिंदादिल, हंसमुख, कर्मयोगी,

असिसटेंट इंजीनियर (पी.एच.ई) ऐसी है उनके व्यक्तित्व की पहचान...

फीचर्स डेस्क । किस्सा शुरू हुआ जब आई उनकी गोद में तीसरी नन्ही परी।  सबको लगा दो बेटियों के बाद अब तो बेटा होगा इसलिए बगल वाली ताईजी ने पहले उन्हे भरपेट भोजन कराया और फिर हाथ में मुझे देते हुये कहा कि माफ कीजिये इस बार भी लड़की हुई है, पापा मुस्कुराए और बोले ताईजी ये तो मेरी नन्ही परी है, मेरी देवी मैया का स्वरूप है...आपने कैसे सोचा मुझे दुख होगा बल्कि मैं तो खुशनसीब हूं क्योकि भगवान बेटी उसी को देते हैं जिन्हे उन्हे तोहफा देना होता है।  ये सुनकर ताईजी के आंख में खुशी के आंसू आ जाते हैं और अस्पताल में मिठाईयां बांटी जाती है....

ऐसे शुरू होती है नन्ही शालू और उसके प्यारे पापा की कहानी...

दोनो साथ में खेलते, मम्मी और दीदी की शालू की शैतानी के खिलाफ की गई शिकायतें पापा के द्वारा नकार दी जाती।  पापा शालू को पढाते, घूमाते,खेलते, सीखाते, पूरे मोहल्ले में उसके सबसे अच्छे दोस्त कहलाते....एक बात ऐसी नही जो शालू के मुंह से निकले और उसके पापा पूरी ना करें..उनका तकियाकलाम 

जो मेरी परी चाहे

पापा के ये लाड़ के शब्द सुनते सुनते बडी़ हुई शालू को गुडि़या ,अच्छी पढा़ई, नई गाडि़यां, महंगे कपडे़ और दुनिया की सारी खुशियां सैंटा पापा से मिलते चले गई और पापा की परी ने एक मेधावी छात्रा के रूप में इंजिनीयरिंग की डिग्री ली। टापर बनी....खूब नाम कमाया...पापा का गर्व बनी अब पापा की इच्छा थी अब कि बिटिया आसमान के सितारे की तरह चमके, बडी़ जगह जाब करे जो उसे घर बैठे उसके मेधावी होने के कारण मिल रहे थे। 

पर शालू के जीवन में कोई आ चुका था और अब वो अपना कैरियर छोडकर विवाह करना चाहती थी। जिद तो थी ही क्योंकि पापा ने हर इच्छा पूरी जो की थी आज तक।  पर इस बार पापा का मन तैयार नहीं था क्योंकि ये फैसला इच्छा का नही उनकी परी के पूरे जीवन से जुडा़ था। पर वो तो है प्यारे पापा और शालू है उनकी वही नन्ही गुडि़या इसलिए बताइए उन्होने क्या कहा होगा। 

जो मेरी परी चाहे

इस बार शालू की आंख में खुशी के आंसू थे, तो ऐसे होते हैं पापा हैना दोस्तों। तो मिलिए शालू और उसके प्यारे पापा यानी मुझसे और मेरे भगवान, मेरी खुशियों का गुलिस्तान,मेरी पहचान,जिन्होने दिया मुझे मेरे जीवनसाथी के रुप में सारा जहान ..मेरे पापा से।  आपने मुझे सब कुछ दिया अब मेरी तरफ से ये प्यारी मेरे मन की भावना आपके लिए। 

आपको पता है मैंने ईश्वर को देखा है,

उनकी ही उँगली थामकर सच्ची राह पर चलना सीखा है। 

बोलते हैं वो तु मेरी नन्ही गुड़िया नन्ही परी है,

दूर है तेरा घरौंदा मेरे आँगन से पर तेरी रूह मुझसे जुड़ी है। 

ईश्वर के इस प्रतिरूप में मेरा सारा संसार समाया है,

मेरे हर सुख-दुख में सदा उन्हें अपने साथ पाया है। 

पापा आपका होना मेरे सारे पुण्य कर्मों की जमा पूँजी है,

आपकी छत्रछाया में रहना ही मेरी खुशियों की कुंजी है। 

आज फादर्स डे पर माँगती हूँ दुआ आपको मेरी भी उम्र  लग जाए,

 हर जनम में आपकी ही बेटी बनूँ क्योंकि आपके चरणों में ही मेरे चारों धाम समाए

आज भी वे मेरे सैंटा है

...आज मेरे प्यारे पापा(एच.एल.जी जैन) 70 साल के हैं पर पता है।   आज भी वे मेरे सैंटा है जो बिन बोले मेरी सब इच्छा पूरी करते हैं।  हा उनकी बिटिया भी कम नही पर।  आज मैने अपने पापा के सारे सपने पूरे कर दिये जो कभी पीछे छूट गए थे।  पापा का नाम रोशन कर उनकी सारी इच्छाएं मैनें पूरी करने की कोशिश की और आगे भी करूंगी।  क्योंकि पापा और मेरे बीच आज भी सब कुछ वैसे का वैसा है बस जो बदल गया है वो है।  तकियाकलाम जो अब मेरा है। 

- जो मेरे पापा चाहें !

नोट : यह प्रतियोगिता एमएमसी ग्रुप और फोकस 24 न्यूज़ के सयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।