फादर्स डे स्पेशल: पूरे संसार की जिम्मेदारी लेकर ईश्वर कहलाए परमपिता

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18th June, 2017 - 1:22 PM, Edited by

नई दिल्ली। पिता ...यानी पल-पल, पग-पग एक नई चुनौती स्वीकार करने वाले। किसी भी स्थिति में अंत तक अपने दायित्व को पूरा करने वाली एक प्रेरणा हैं। बुरी तरह थका देने वाली अनंत जिम्मेदारियों के बाद भी मुस्कुराते रहते हैं। जिम्मेदारी संसार का सबसे भारी शब्द है। यदि यह मनुष्य रूप में जीवित हो सकता तो हूबहू पिता जैसा ही दिखता। यह पता सबको है लेकिन इस तरह से हमने पहले कभी सोचा ही नहीं।

ईश्वर: पूरे संसार की जिम्मेदारी ली, इसलिए हैं परमपिता

संपूर्ण संसार को चलाने की जिम्मेदारी है इसीलिए ईश्वर परमपिता कहलाते हैं। इस तरह सर्वोच्च जिम्मेदारी निभाने का अर्थ ही पिता होना है। हर पिता अपने-अपने संसार की जिम्मेदारी निभा रहा है। वे ईश्वर की तरह ही अपने बच्चों के अच्छे-बुरे का ध्यान रखते हैं। उसे सही मार्ग बताते हैं। ईश्वर हर क्षण विश्व के लिए चुनौती लाता है। पिता भी तो ऐसे ही कठोर रहकर, कड़े नियम बनाकर बच्चों को श्रेष्ठ बनाते हैं।

राजा भरत: जन्म नहीं, कर्म से ही श्रेष्ठ होता है व्यक्ति

पिता की जिम्मेदारी का श्रेष्ठ उदाहरण हैं शकुन्तला पुत्र सम्राट भरत, जिनके नाम पर हमारे देश का नाम है। उनके नौ पुत्र थे। किन्तु अयोग्य। उनका मानना था शासक, प्रजा का पिता होता है, इसलिए योग्य को ही सम्राट बनाना चाहिए। गोद लिए योग्य पुत्र को उन्होंने सम्राट बनाया। और संसार में स्थापित किया: मनुष्य जन्म से नहीं, कर्म से ही महान् होता है।

पिता भी तो इतने ही न्यायसंगत होते हैं। कुछ भी बच्चों को ऐसे ही नहीं सौंप देते। उन्हें इस योग्य बनाते हैं कि वह स्वयं के पैरों पर खड़े हो सकें।

भीष्म: दृढ़ रहकर त्याग से बिना पिता बने ही पितामह कहलाएंगे 

पिता बनने के लिए पिता होना जरूरी नहीं है। राजपाट त्यागकर कभी पिता न बनने की पिता से विराट प्रतिज्ञा करने वाले भीष्म, संसार के प्रथम पितामह कहलाए। किन्तु शासन की जिम्मेदारी निभाते रहे। त्याग का प्रतीक, भीष्म प्रत्येक पिता का प्रतीक ही तो हैं। पिता भी इसी तरह दृढप्रतिज्ञ होते हैं कि उन्हें परिवार की हर जिम्मेदारी निभानी है। 

बच्चे के जन्म के समय ही पिता तय कर लेते हैं कि उसे अच्छी शिक्षा, अच्छा भोजन, हर सुविधा देंगे, जिसका वे जीवनभर पालन करते हैं।

पैगम्बर: हज करने से भी बड़ी है बेटी की जिम्मेदारी

पैगम्बर हजरत मोहम्मद ने बताया है कि परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाले लोग श्रेष्ठ हैं। हज बड़ा पुण्य है। किन्तु पैगम्बर साहब ने बताया है कि बेटी की शादी करने पर एक हज करने का पुण्य मिलता है। परिवार की सुरक्षा, बच्चों की पढ़ाई, उनके लिए अच्छे भोजन की व्यवस्था करना पिता की पहली जिम्मेदारी बताई गई है।