भारत के राजपूतों! सुप्रीम कोर्ट पूछ रहा है कि "मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का कोई वंशज जीवित है क्या?"

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11th August, 2019, Edited by manish shukla

भारत के राजपूतों! सुप्रीम कोर्ट पूछ रहा है कि "मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का कोई वंशज जीवित है क्या?"
अब उत्तर आपको ही देना होगा। बताइये कि राष्ट्र की रक्षा के लिए रणभूमि को सबसे अधिक रक्त समर्पित करने वाले सारे राजपूत किसी अरब या येरूसलम से नहीं आये, उन्हीं राम के वंशज हैं। 
और लगे हाथ यह भी बताइयेगा कि शेष भारत भी वशिष्ठ, गौतम, केवट, कृष्ण, आदि का ही वंशज है। बताइये जज साहब को कि वे स्वयं भी इन्हीं में से किसी के वंशज हैं।
बताइये कि विश्व के अन्य पन्द्रहों देशों में राम को अपना पूर्वज बताने वाले लोग राम के वंशज हो न हों, पर वे सब राम कृष्ण के ही मानस पुत्र हैं।
कहिये! कि 'रामजन्मभूमि को छोड़िये, जिस भूमि पर सुप्रीम कोर्ट स्थापित है वह भूमि भी राम की है, कृष्ण की है।'
और यह बात तनिक कठोर होगी, पर जिस पैसे से सुप्रीम कोर्ट को वेतन दिया जाता है न, वह पैसा भी राम के ही वंशज देते हैं।
उन्हें बताइये कि जो बुद्धिजीविता पितरों की पहचान पर प्रश्न करे, वह बुद्धिजीविता नहीं मूर्खता होती है।
सम्प्रदाय बदल लेने से इतिहास नहीं बदल जाता, और ना ही बदलते हैं पूर्वज! इस राष्ट्र की इंच-इंच भूमि उसी राम-कृष्ण-केवट-निषाद-शबरी या गौतम वशिष्ट आदि की है। 
आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी व्यवस्था में कार्य कर रहे व्यक्ति को यह अधिकार नहीं होता कि वह सभ्यताओं पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सके। भारतीय न्यायालय का कठघरा इतना भी शक्तिशाली नहीं कि उसमें इतिहास खड़ा हो।
अनेक युद्धों में विजय के बाद भी पराजित से चरण रखने भर की भूमि भी नहीं लेने वाले राम और कृष्ण का इतिहास इतना महान है कि वर्तमान केवल उसे प्रणाम कर सकता है, प्रश्न नहीं पूछ सकता।
उठिए! उत्तर दीजिये! प्रश्न केवल सुप्रीम कोर्ट नहीं कर रहा है, प्रश्न समय कर रहा है। आज उत्तर नहीं दिया तो सभ्यता के न्यायालय में आपकी पीढ़ी सदैव अपराधी बन कर शीश झुकाए खड़ी रहेगी।
हिंदुकुश से ब्रह्मपुत्र तक, कैलाश से हिन्द महासागर तक की उंगल-उंगल भूमि राम की है, और इस नाते हर रामपुत्र का अधिकार है उस पर। राम की भूमि हम सब की है, पर आज इसकी गवाही आपको ही देनी होगी। समय आज आपके द्वार पर खड़ा है।
भारत के राजपूतों! उत्तर दो... कहो कि तुम हो राम के वंशज। तुम हो राम के उत्तराधिकारी। राम जन्मभूमि तुम्हारी है। तुम्हारी सिद्ध होते ही वह समूचे भारत की हो जाएगी।

लेखक 

सर्वेश तिवारी श्रीमुख
गोपालगंज, बिहार।