जन्माष्टमी स्पेशल: कृष्ण के जीवन की ये चार कहानियां बताती हैं कि कैसी हो मनुष्य की जीवनशैली

Slider 1
Slider 1
Slider 1
Slider 1
Slider 1
« »
14th August, 2017 - 9:55 AM, Edited by

नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण के सैकड़ों-हजारों नाम हैं। इनके इतने ही रूप हैं। ये रूप उनकी किसी न किसी लीला से लिए गए हैं। हर लीला से हमें शिक्षा मिलती है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आइए जानते हैं कृष्ण के जीवन की 4 शिक्षाएं-

महिलाओं को जीवन में दें सर्वोच्च स्थान

बलराम सुभद्रा का विवाह दुर्योधन से करना चाहते थे। कृष्ण ने बहन का मन समझा और अर्जुन से विवाह की अनुमति दे दी। उन्होंने द्रौपदी की लाज बचाई। शिशुपाल की सौ गलतियां क्षमा करने का वचन दिया। नरकासुर का वध कर 16100 राजकन्याओं को मुक्त कराया। समाज उन्हें स्वीकार करे, इसलिए पत्नी का दर्जा दिया।

कर्तव्य के बदले लाभ की कामना गलत

ब्रजवासी यज्ञ करने जा रहे थे। कृष्ण को पता चला कि ऐसा इंद्रदेव को खुश करने के लिए हो रहा है, नहीं तो वर्षा नहीं होगी। कृष्ण बोले- वर्षा करना तो इंद्र का कर्तव्य है, इसलिए यह यज्ञ अनुचित है। पूजा तो पशुओं का पोषण करने वाले गोवर्धन पर्वत की होनी चाहिए। इंद्र रुष्ट हुए। इतनी वर्षा की कि बाढ़ आ गई। कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर सभी को बचाया। 

जीवन देने वाली वस्तु की रक्षा करना धर्म 

यमुना कालिया नाग की वजह से विषैली हो रही थी। गायें-बछड़े पानी पीकर मर रहे थे। नदी को विष से मुक्त करने के लिए श्रीकृष्ण ने एक बार खेलते समय गेंद नदी में फेंक दी। जैसे ही वे यमुना में उतरे, कालिया नाग ने उन्हें जकड़ लिया। कृष्ण ने उसका फन कुचल डाला। यमुना नदी जीवनदायनी है, वह विष से मुक्त हो गई।

स्नेह रखने वालों का क्रोध भी स्वीकार करें 

युद्ध जीतने के बाद पांडव मां गांधारी के पास गए। उनसे पहले कृष्ण जा पहुंचे। गांधारी कृष्ण से स्नेह रखती थीं, किन्तु पुत्रों के विनाश से क्रोध में थीं। कृष्ण को शाप दे डाला-मेरी तरह तुम्हारा वंश भी नष्ट होगा। कृष्ण मुस्कुराते हुए बोले-तथास्तु। उन्होंने पांडवों को गांधारी के क्रोध से बचाया, साथ ही बड़ों के सम्मान की परंपरा भी स्थापित की।