अनुभव : एक ऐसा देश जहाँ हवा को भी पढ़ना आता है...

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7th June, 2019, Edited by Shivangi Agarwal

फीचर्स डेस्क। सिक्किम में प्राकृतिक सौंदर्य को द्विगुणित करते हुए जगह जगह लगे रंगीन झंडे और रंगीन कपड़ों की लड़ियाँ दिखाई देती हैं। ध्यान से देखने पर इन झंडों पर कुछ प्रतीक व पवित्र मंत्र लिखे रहते हैं। इन झंडों को स्वच्छ व हवा के प्रवाह वाली जगहों पर लगाया जाता है। घर के बाहर, छतों पर व अन्य जगह भी आप इन्हें देख सकते हैं। माना जाता है कि हवा से हिलने पर इन मंत्रों की सकारात्मक ऊर्जा वातावरण में भी तिर जाती है व कल्याणकारी होती है।

छोटे कपड़े के टुकड़े जिन्हें एक लम्बी रस्सी पर बांध कर टाँगा जाता है lunga ta( wind horse) कहलाते हैं व बड़े झंडे Darchog कहलाते हैं। पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते इनके रंगों का क्रम भी निश्चित रहता है।बाएं से दाएं नीला,सफेद,लाल,हरा व पीला।लाल अग्नि,हरा पानी, पीला धरती और नीला हवा का प्रतीक है।इन्हें उत्तर,दक्षिण,पूर्व,पश्चिम व मध्य पाँच दिशाओं का प्रतीक भी माना जाता है।

इन रंगों का समय के साथ फीका होना भी शुभ माना जाता है। इसी प्रकार के सफेद झंडे किसी प्रियजन की मृत्यु उपरांत आत्मा की शांति की कामना के साथ लगाए जाते हैं। इनकी संख्या 108 होती है। बौद्ध ध्वज या पंचशील ध्वज यह ध्वज बौद्ध धर्म के प्रतीक एवं बौद्धों के सार्वभौमिक प्रतिनिधित्व के लिए 19 वीं सदी में बनाया गया था। यह दुनिया भर में बौद्धों द्वारा प्रयोग किया जाता है। माना जाता है कि ध्वज के छह ऊर्ध्वाधर बैंड आभा के छह रंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बुद्ध के शरीर से उत्पन्न हुए जब उन्होंने ज्ञान प्राप्ति की थी।

नीला: प्यार, दया, शांति और सार्वभौमिक दया का प्रतीक है।

पीला: (मध्य पथ) - खालीपन और चरम सीमाओं से परहेज है।

लाल: अभ्यास का आशीर्वाद - उपलब्धि, ज्ञान, सदाचार, भाग्य और गरिमा

सफेद: धर्म की पवित्रता - मुक्ति के लिए अग्रणी, समय या स्थान के बाहर

केसरी: बुद्ध की शिक्षा - ज्ञान

छठे ऊर्ध्वाधर बैंड, ध्वज पर, पांच अन्य रंग के आयताकार बैंड का एक संयोजन से बना है, और आभा के स्पेक्ट्रम में अन्य पांच रंगों में से एक यौगिक का प्रतिनिधित्व करता है। इस यौगिक रंग (प्रकाश का सार) प्रभासार के रूप में जाना जाता है। मोन्सट्री में लगे प्रार्थना चक्र की संख्या भी 108 होती हैं।इस पर भी मन्त्र लिखे रहते हैं।जिनमे से मुख्य मन्त्र Om Mani Padme Hum है।लकड़ी आदि धातुओं से बने होने के कारण यह हवा से नहीं घूमते। श्रद्धालु मन्त्र का जाप करते हुए विश्व कल्याण की भावना के साथ इन्हें हाथ से घुमा, वातावरण को पवित्र बनाते हैं।माना जाता है कि अगर कोई अनपढ़ या मूक व्यक्ति भी इन चक्रों को घुमाता है तो मन्त्र जपने जैसा ही पुण्य लाभ उसे प्राप्त होता है।

कंटेंट सोर्स : निधि अग्रवाल, झाँसी सिटी।