Navratri Special : सिटी के इस मंदिर में हुआ था लव-कुश का मुंडन, पहले था शहर का नाम कर्णपुर !

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10th October, 2018, Edited by Focus24 team

कानपुर सिटी। नवरात्री में माँ दुर्गा की नव दिनों तक पूजा किया जाता है। ऐसे में शारदीय नवरात्रि का आज से शुरुआत हो गई। बता दें कि कानपुर सिटी में बिरहाना रोड पर एक ऐसा मंदिर हैं जहाँ कभी लव-कुश का मुंडन हुआ था। यही नहीं इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। कहा जाता है की महाभारत के राजा कर्ण भी देवी जी के दर्शन के लिए आते थे। इस शहर के नामकरण के बारें में कहा जाता है कि राजा कर्ण की राजधानी कर्णपुर थी, जो बाद में कानपुर के नाम से जानी जाने लगी। इस मंदिर में नवरात्री के समय राजा कर्ण माता रानी के दर्शन के लिए यहां आते थे। यहाँ आने का रास्ता उस समय सुगम नहीं था, लोग शाम को यहाँ आने से डरते थे।  अब इस जगह का नाम बिरहाना रोड पड़ा।

 कभी सीता मा भी यहाँ रहती थी

इस मंदिर में प्रतिदिन आराधना के लिए आने वाले शिवप्रकाश का कहना है कि मंदिर का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा है। लगभग 65 वर्ष के शिवप्रकाश की बात को मानें तो जब राम जी ने सीता माता का त्याग किया था तो उस समय लक्ष्मण जी माता को यहां छोड़ गए थे। तब यहां घना जंगल हुआ करता था, जिसके बाद सीता माता यहां से बिठूर चली गयी और वहां से पैदल ही यहां रोज़ आकर तप करने लगीं। फिर यहां पर देवियां उत्‍पन्‍न हुईं और यह जगह तपेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध हो गयी।

कानपुर का नाम पहले था कर्णपुर

मंदिर के पुजारी की मानें तो यहाँ राजा कर्ण भी दर्शन के लिए आया करते थे। बताया जाता है कि कानपुर का नाम पहले कर्णपुर हुआ करता था, जो राजा कर्ण की राजधानी थी। फिर बाद में इसका नाम कानपुर हो गया। यहां जिले से ही नहीं बल्कि कई शहरों से भक्त माता के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां लव-कुश का मुंडन भी हुआ था, जिससे लोग अपने बच्चों का मुंडन और कर्णछेदन भी यहीं कराते हैं।

 लोग आते हैं यहाँ बच्चों का मुंडन कराने

इस मंदिर के इतिहास के अनुसार मां सीता के यहाँ तप करने कारण इस मंदिर का नाम तपेश्वरी देवी पड़ा। यहाँ पहले बहुत बेरों के पेड़ हुआ करता था, बाद में इस जगह का नाम बिरहाना रोड हो गया। अब यहाँ आस्था में भरोषा रखने वाले बच्चे का मुंडन कराने के लिए आया करते हैं। कुछ घरों के सारे बच्चों का मुंडन इसी मंदिर में हुआ करता है।