भगवान की जरूरत क्यों ?

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13th March, 2019, Edited by Shivangi Agarwal

फीचर्स डेस्क। एक बार देवी ने भगवन से पूछा इन्सानों को हमेशा अपने लिये किसी भगवान कि जरूरत क्यो पड़ती है?  जबकि उसका जीवित रह कर सांस लेना ही इस बात का प्रमाण है कि स्वयं उसमें ईश्वर है,  आप है! वो स्वयं ईश्वर का अंश है और इस तरह वह स्वयं शिव है ..??? 

उत्तर में भगवन ने क्या कहा होगा बता सकते है आप ....?

उत्तर में भगवन ने कहा कि मनुष्य नें स्वंय हमें रचा है, अपनी ईच्छाओ की पूर्ती का माध्यम बना कर अपनी कमजोरियों को छुपाने या उनके साथ जीते रहने के बहाने के लिये. हिम्मत को और प्रेरणा को अपने से बेहतर जगह (मुझमें) तलाशने के लिये। अपनी कामयाबी या नाकामयाबी को अपने नाम कर पाने के डर व झिझक में जीवन के मोह और मृत्यु के डर के कारण। परस्पर रिश्तों व अन्य मोह के कारण। मनुष्य ने हमें कभी नहीं देखा, नां मिला कभी कोई, पर अपने आप से ज्यादा वो हम पर विश्वास रखता है क्योकि हे देवी वो या तो जानता ही नही कि हम स्वंय उसमें रहते है जीवन बन कर या जानता तो है पर विश्वास नहीं करता।

अपने पर विश्वास करना उसे नामुमकिन सा लगता है। हां कभी कभी कोई होता है जो समझ जाता है कि वही "शिव "है और उसमें ही "शक्ति" (तुम) है। पर तब वो इस  ईश्वरिय तत्व के ज्ञान के दंभ में रावण या हिरणाकश्यप या कंस के पात्र में आकर पृथ्वी पर मानव के स्वंय को ईश्वर मानने के डर को और बढा़ देता है।

और जब जान जाता है कि "मैं "ही "वह"हूं तब वो "बुद्ध या नानक " बन सारी मोहमाया से मुक्त हो मुझमें रम जाता है. इसके लिये पाप और पुण्य आदि जैसे शब्दों का निर्माण भी स्वंय मनुष्य नें ही किया है! व्यवहारो पर सीमाएं बना कर बांध लगाये रखने के लिये. मानव नें अपने विश्वास को हममे संचारित कर पुन: उस विश्वास को हमारे माध्यम से पाता है। अर्थात पहुंचता तो है खुद के ईश्वरिय तत्व तक ,पर घुम फिर कर और इस तरह वह अपनेअन्दर के रावण का नाश करने का रास्ता ढूंढ़ता रहता है।

हे देवी जिस दिन मानव जान जायेगा या जो जो मानव ये सत्य जान और मान जायेगा कि मनुष्य और 'मैं' एक ही हूं, तब उसे अपने अन्दर या बाहर के कंस या रावण (बुराईयों) से बचने/ संहार के लिये किसी सहारे की जरूरत नही होगी। वो (बुराईयां) तब अस्तित्व ही नही रखती , क्योकि वह समझ चुका होगा कि "मैं" जहां होता हूं , वहां सिर्फ "मैं" ही होता हूं। मैं विश्वास में निहित होता हूं। मैं विश्वास हूं, सात्विक सरल निर्मल विश्वास ! सम्पूर्ण शाश्वत परम सत्य !! बस इसलिये मनुष्य को मेरी जरूरत पड़ती है !

नोट : ये एक कहानी है, कोई धार्मिक प्रवचन नही! कृपया इसमें कोई अन्यअर्थ ढूंढने का प्यास ना करे !

कंटेंट सोर्स : सीमा राठौर के फेसबुक वाल से....