प्यार का रंग

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19th September, 2019, Edited by Shivangi Agarwal

फीचर्स डेस्क। अंजू द्विवेदी रायपुर छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं।  इनको लेखन का शौक तो बचपन से था, लेकिन इस प्रतिभा को उभारा एक मंच ने। वहाँ से जुड़ कर एक लेखिका के रूप में इनको पहचान मिली और बहुत सी सखियां भी। उन्ही सखियों के साथ मिल कर इन्होने एक सपना देखा खुद की किताब लिखने का सपना। जो कि अब आप सभी के सामने है "शब्दमोती" के रूप में। ये सिर्फ किताब ही नही हम सतरंगी सखियों का साझा योगदान है। बता दें कि  शब्दमोती किताब में सभी सखियों द्वारा तीन-तीन कहानियां लिखी गई है। इन तीन कहानी कुछ इस तरह हैं।

1. प्यार के रंगों से सराबोर कहानी "प्यार का रंग" में अनुभा और कबीर के प्रेम की छाप देख कर कहीं ना कहीं आप सभी के मन में भी प्रेम की अनुभूति होगी। कहा जाता है प्यार उम्र के साथ कम होता चला जाता है। लेकिन अनुभा अपने पुराने दिन याद कर के अपने वैवाहिक जीवन को फिर से प्यार के रंगों से भरने की कोशिश करती है।

2. आज-कल प्यार का मतलब सिर्फ शारीरिक आकर्षण ही हो कर रह गया है। लेकिन कुछ ऐसे भी होते है जो इसे दिल से निभाते है, मानसी ने भी धीरज को अपना सब कुछ मान कर उसे खुद को सौप दिया था, लेकिन धीरज भी उन्ही की तरह निकला जिनके लिए प्यार एक खिलौना होता है। लेकिन समय की तेज गति सब कुछ बदल देता है, धीरज की करनी का फल किस तरह उसकी बेटी के लिए अभिशाप बन जाता है, पढिये मेरी कहानी "फांस" में 

3. अंधविश्वास से ग्रसित समाज की बहुत सी कुरीतियों को दर्शाती कहानी "अंधविश्वास- अज्ञानता से उपजा हुआ ज्ञान" जिसमे समाज की उन बुराइयों का वर्णन है जो हमारे समाज की नींव को खोखला कर रही है।