बुढापे का दर्द

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6th October, 2019, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क।  जीवन के इस खत्म होते मोड़ पर, उम्र के ढलान की, यह कैसी अजब कहानी है।

साथ है मेरे हमसफर पर लगती फिर भी, सूनी -सूनी सी जिन्दगानी है।

कभी बच्चों की मीठी बातों से घर एक गुलजार चमन था, पर अब छाई आज वीरानी है।

हैं दूर आज आँखों से टुकड़े जिगर के तड़पाती है याद उनकी, ले आती आँखों में पानी है।

मन लगता नहीं किसी काम में, चुभती हैं यादें दिल में तीर बन कर, लगता ये जीवन बेमानी है।

मन को डसता है अकेलापन, बोझिल सा रहता है मन, ढलती उम्र की ये दास्ताने जिन्दगानी है।

कंटैंट सोर्स : अन्नपूर्णा मिश्रा झारसुगुड़ा ,ओडिशा।