सौतेली माँ

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25th September, 2019, Edited by Pratima Jaiswal

फीचर्स डेस्क। "देखो रिया,बेटा तुम्हें कॉमर्स विषय से ही स्नातक करना पड़ेगा।" 'लेकिन पापा, मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं बचपन से मेरा सपना है यह। इसलिए मुझे साइंस लेना है।" "डॉक्टरी की फीस में तो बहुत पैसे लगते हैं। मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं तुम्हारे सपने के ऊपर उड़ाने के लिए। अभी तुम्हारे भाई की इंजीनियरिंग की फीस भी भरनी है। उसके इंजीनियर बनने से तो हमारा बुढापा भी सुधर जाएगा। तुम्हारा क्या है। शादी करके ससुराल चली जाओगी सारी कमाई ससुरालवालों पर लुटाओगी। पहले पढ़ाई पर पैसे लगाओ फिर दहेज भी दो शादी में। इससे अच्छा है ग्रैजुएशन के बाद शादी कर दूंगा। सम्हालो अपना घर उसके बाद।'

मायूस रिया अपने कमरे में आकर रोने लगी। पापा को तो उसके सपनों की परवाह ही नहीं बस बेटे की परवाह है। जब अपने पापा ही साथ नहीं दे रहे तो सौतेली माँ से क्या उम्मीद करूँ। वो तो अपने बेटे के भविष्य के लिए ही सोचेंगी न। वैसे भी मुझसे सख्ती से पेश आती हैं।मेरा डॉक्टर बनने का सपना तो अधूरा ही रह गया। तभी उसने अपने सर पर ममता भरा स्पर्श महसूस किया।देखा तो सौतेली माँ खड़ी थी।रिया ने चेहरा घुमाकर आंसू पोछ लिए।

"मुझसे अपने आंसू मत छिपाओ रिया।मैंने तुम्हारे पापा की बातें सुन ली हैं। तुम अपना सपना अवश्य पूरा करोगी। मैं  तुम्हारे साथ हूँ।" "लेकिन आप क्यों मेरा साथ देंगी? आप तो अपने बेटे का ही साथ देंगी न। आजतक मुझसे ढंग से बात तक नहीं की आपने तो फिर आज क्यों?"

"मानती हूं मैं तुम्हारे साथ सख्ती से पेश आती हूँ। वो इसलिए ताकि कल को कोई ऊँच नीच न हो जाए।लोग तो मुझे ही दोष देंगे कि सौतेली माँ थी तो ध्यान नहीं दिया लड़की पर।लेकिन आज बात तुम्हारे सपनों की है। मेरा भी सपना था लेखिका बनने का लेकिन शादी के बाद वो सपना ही रह गया।मैं नहीं चाहती कि मेरी तरह तुम भी जीवनभर इस अफसोस के साथ जिंदगी बिताओ। तुम जियो अपने सपने मैं तुम्हारे पापा से बात करूंगी। जरूरत पड़ी तो अपने गहने भी बेच दूँगी। जहाँ तक दहेज की बात है मेरी बेटी इतनी काबिल बनेगी कि रिश्तों की लाइन लग जाएगी उसके लिए।"

मां कहते हुए रिया उनके गले लग गई। अपने पति को समझा कर उन्होंने रिया का एडमिशन साइंस विषय में करवाया। आज रिया के एक हाथ में डॉक्टर की डिग्री थी और दूसरे हाथ मे मां लिखी हुई कहानियों की किताब। जो उसने उनकी पुरानी डायरी से ली थी।

आज उसने कहा, "उस दिन आपने कहा था न तुम जियो अपने सपने आज मैं आपसे कहती हूँ आप जियो अपने सपने।"

कंटैंट सोर्स : रिमझिम अग्रवाल, बड़ोदरा, गुजरात।