पार्ट 04 : स्मित हास्य से तुम...

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8th February, 2019, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। आज बहुत  दिनों बाद तुम्हे देखा सुबह  इतनी  व्यस्त होती है की  लिखने नही बैठ पाती कुछ भी जीवन है उतार चढ़ाव भी और कई सारी मुसबीते भी एक खत्म दूसरी  हाथ   बांधे सामने  नज़रअंदाज़ करने की भरसक कोशिश पर कामयाबी नही मिलती ,,उदास होती हूँ घबराती भी हूँ उलझन के साथ एक अनजाना डर भी...!

पर जब तुम्हे देखती हूँ तो थोड़ी शांत हो जाती हूँ एकदम अड़िग आंधी हो या तेज तूफ़ान तुम टूटते हो  ,झरते हो  सूखते भी हो पर विचलित नही होते,तुम्हारी बेबाकी और मजबूत इरादों के सामने मै खुद को मजबूत कर लेती हूँ, कोशिश करती हूँ  पर इंसान हूँ ना और स्त्री हूँ तो कई किरदार निभाते हुए हमेशा एक डर की अनुभूति बनी होती है, 

सुनो ! हम इंसान भी थोड़े मजबूत होते  एक दूसरे को थाम सकते समझ सकते तो कई सारी विपदाओं से बचते  ,छोटी सी जिंदगी मे बहुत सारे अनचाहे कष्ट उठाते है इंसान , अपनी अपनी दिक्कतों से जूझते इंसान जिंदगी जी नही पाते खुशियां कम और उलझनें और जिम्मेदारियों के भारी भरकम  लबादों मे कहीं खो सा गया है।

हर कोशिश वह सिर्फ भागम भाग  और व्यस्त। अपने लिए समय और ख़ुशी  दोनों ही  त्याग देता है,कहते है इंसान के लिए जिंदगी एक नेमत है पर वह इस खूबसूरत नेमत की ख़ातिर तमाम परीक्षाओं से गुजरता है।  शायद इंसान ईश्वर और कुदरत मे यही फर्क है ,सब अपनी अपनी धुरी मे चलते है  यह जानते हुए की एक दिन हम भी इस धुरी को  नाप लेंगे और  यह सफ़र यही खत्म हो जाएगा, हम अपनी अपनी  धुरी मे एक दिन अस्तित्व हिन् हो जाएंगे,फिर क्यों हम  खुश नही हो पातें क्यों खामखाँ एक डर को पाले रहते है, एक दूजे के कामो मे खलल डालते है दंगे फसाद करते है, क्यों नही अमन शांति से  जीते और जीने नही देते अगर हो समाधान तो जरूर बताना...!

क्योंकि तुम ही हो जो कई  झँझवातो से गुज़र  कर भी  एकदम शांत और स्मित हास्य के साथ आने वाले  पल का  अडिगता से इंतज़ार करते हो एक मजबूत इरादें के साथ। काश हम इंसान भी  तुम्हारी तरह मजबूत होते...!!

सुरेखा अग्रवाल, “स्वरा” , लखनऊ सिटी।