Teachers Day Special: गुरु की सीख ने बदल दी इनकी जिंदगी की राह, मंजिल भी मिली और जीत लिया जहान

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5th September, 2018, Edited by Neeraj tripathi

वाराणसी सिटी। गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय...। कबीर की यह पंक्तियां आज भी प्रासंगिक हैं। गुरु ही हमारे भविष्य को गढ़ता है, हमें अच्छे-बुरे का भेद बताता है,  हमें वह दिशा देता है, जहां हमारी मंजिल है। हर शिक्षक अपने शिष्य को सही मार्ग पर चलना सिखाता है, लेकिन कई बार शिष्य उस रास्ते पर चलकर आसमान में ध्रुव तारे के समान चमकता है तो कभी वह अपनी राह खुद चुनता है। शहर में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने अपने गुरुओं के बताए रास्तों पर चलकर मंजिल पाई। वे अपने गुरु की दी हुई सीख को अब अपने शिष्यों को दे रहे हैं...।  

सारा श्रेय गुरु जी को जाता है

आज शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं अपने गुरु डॉ. एमएस तिवारी और डॉ. हरिशंकर गौर को दिल से प्रणाम करता हु। आज मै जिस मुकाम पर हु, उसका सारा श्रेय गुरु जी को जाता है। उन्होंने मुझे रिसर्च करना सिखाया और समय-समय पर जीवन में आने वाली हर महत्वपुर्ण बात पर अच्छी सिख देते रहे।   

डॉ, आनंद कुमार द्रिवेदी, प्रोफेसर, हरिश्चन्द्र पीजी कालेज, वाराणसी सिटी।  

अध्यापक अपने छात्रा का भविष्य को गढ़ता है

शिक्षक दिवस अपने गुरु के साथ-साथ मै सभी शिक्षको को बधाई देता हु। आज के दिन जिनके भी गुरु हैं वो उनका अशिर्बाद लें। दरअसल, किसी भी छात्र के जीवन में अध्यापक का एक बड़ा रोल होता है। जिस तरह से कुम्हार कच्चे मिटटी के घड़े को अपने तरीके से गढ़ता है, उसी तरह से एक अध्यापक भी अपने छात्रा का भविष्य को गढ़ता है।  

के. के. अग्रवाल, हेड ऑफ़ कामर्स, महात्मा गाँधी काशी विद्या पीठ, वाराणसी।  

गुरु माता मुझे रोक लेती थी...

आज मै अपने गुरु प्रेम शंकर वाजपेयी को ह्रदय से आभार प्रकट करता हु, मेरे पीएचडी के दौरान अक्सर में रात को देर हो जाती थी, तो गुरु माता मुझे रोक लेती थी और मेरे खाने और रहने की पूरी इंतजाम करती थी। आज मै अपने गुरु के साथ-साथ गुरु माता को भी प्रणाम करता हु। आज भी जब मै किसी बात को लेकर परेशान होता हु तो गुरु जी से बात करता हु।   

डॉ. बृजेश कुमार जायसवाल, प्रोफ़ेसर, हरिश्चन्द्र पीजी कालेज, वाराणसी सिटी।  

पूजी को सभाल कर रखना भी हमारी जिमेवारी

सभी के जीवन में एक शिक्षक ही ऐसा पूजी होती है जो पूरी जिन्दगी उसके साथ रहती है, उनके द्वारा दिए हुए पूजी को सभाल कर रखना भी हमारी जिमेवारी होती है। आज मैं शिक्षक दिवस पर अपने गुरु स्व।  प्रो।  केसी साहू नम आखों से याद करती हूँ। वो अब इस दुनिया में नहीं हैं, पर उनका मार्गदर्शन और आशिर्बाद हमेशा मेरे साथ है।  

डॉ. संध्या द्रिवेदी, सूचना विभाग, बीएचयू, वाराणसी सिटी।  

मै जो कुछ हु गुरु जी के वजह से...

गुरु के कारण जीवन में हुआ परिवर्तन मेरे गुरु डॉ.  आंनद कुमार दुबे के कारण मेरे जीवन में परिवर्तन आया और आज मै जो कुछ हु गुरु जी के वजह से हु। उन्होंने कहा था कि अपने काम में खुद को हमेशा जीरो समझो। ऐसा करने सीखने की ललक बढ़ेगी और रचनात्मकता का विकास होगा। आज शिक्षक दिवस पर सादर प्रणाम करता हु। गुरु की सराहना मिली तो लगा सपना है या हकीकत है।

ध्रुव कुमार जायसवाल, अशकालिक प्रवक्ता, हरिश्चन्द्र पीजी कालेज, वाराणसी सिटी।  

मैं अपने गुरु डॉ. आंनद कुमार दुबे को शिक्षक दिवस पर सादर प्रणाम और बधाई देती हूँ। मेरे गुरु न केवल मेरे शिक्षक बल्कि मेरे मार्गदर्शक भी हैं। ये मेरा सौभग्य है कि मै ऐसे गुरु का आशिर्वाद पा सकी। एक बार जब उन्होंने मेरी तारीफ की पढाई को लेकर तो मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह कोई दिवास्वप्न है या हकीकत।

आकांक्षा पाठक,  प्रवक्ता, हरिश्चन्द्र पीजी कालेज, वाराणसी सिटी।

सिखाया हार न मानना मैं गुरु डॉ. आंनद कुमार दुबे को शिक्षक दिवस पर बधाइ देती हु। गुरु जी अकसर कहते थे कि कभी हार मत मानो, मेहनत करते रहो। उन्होंने कहा काम और पढ़ाई में जितना एफर्ट करोगे उतने अच्छे रिजल्ट्स मिलेंगे। मैंने उनकी बात मानी जिससे आज यहा हु।

मोहिनी कुशवाहा, हरिश्चन्द्र पीजी कालेज, वाराणसी सिटी।