sunday special : बेजुबानों और स्ट्रीट डॉग्स की मसीहा हैं रितु सूद, जानें क्यों है इनको इतना प्यार !

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25th March, 2018, Edited by Neeraj tripathi

ज़िन्दगी जानवर की बदहाल है, पूछता खुद-ब-खुद में सवाल है, आदमी क्यूँ बदल रहा चाल-ढाल है, जगह जानवर की लेने को तैयार है।।

वाराणसी सिटी। कलयुग का जबरजस्त पकड़ और लोगों में स्वार्थ की होड़ मची है।  वहीँ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन्सान तो इन्सान बेजुबान जानवरों से भी इतना प्रेम करते हैं की उनकी मिशाल देने लायक होती है। जी, हाँ मैं बात कर रहा हु वाराणसी सिटी की Ramaiya Charitable Foundation की वलिंटीयर रितु शूद की।

रितु की दिनचर्या शहर में घूमने वाले मवेशियों के लिए खाना, पानी और दवा का इंतजाम करने से शुरू होती है। सुबह उठकर घर के सामने सड़क किनारे चल फिर रहे स्ट्रीट डॉग्स, सांड और गाय को खाने की व्यस्था करना इनकी रूटीन में शामिल है। बता दें कि रितु पिछले कई सालों से अपने आसपास इन बेजुबानों के लिए मसीहा हैं।  इन जानवरों खासकर स्ट्रीट डॉग्स को खाना से लेकर दवा तक की जिम्मेदारी ये बखूबी निभा रही हैं। तो आइये जानते है रितु शूद से कैसी है इनकी सफ़र और कैसे इनके लिए समय निकलती है और क्या है इनकी देखभाल की स्ट्रेटजी…

तो इस वजह से होती है मौत

हर कुत्ते को अच्छी देख भाल की जरुरत होती है फिर चाहे वो घर पर हो या सड़क पर, लेकिन सड़क पर रहने वाले कुत्तों की देख भाल नहीं होती है, क्योंकि वो सड़क पर रहते हैं, और कई बहुत सारी बीमारियों के भी शिकार हो जाते हैं  जिसकी वजह से उनकी मौत हो जाती है।

लोग करें प्यार तो बने बात

आप घर में अकेली रहती हैं तो आप इनका सहारा ले सकती हैं, यकीन मानिये ये आपको इंसानों से अधिक सेफ रखेगें। साथ ही पेट के लिए दर-दर भटक रहे इन बेजुबानों को एक बेहतर ज़िन्दगी तो देंगे ही साथ ही इनका प्यार भी हमे मिलेगा।

स्ट्रीट डॉग्स पालने से पहले

सड़क के कुत्तों को पालने से पहले हमे कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा, दरअसल, सड़क पर जिन्दगी गुजारने वाले ये डॉग्स ग्रुप में रहते हैं। लेकिन ये एक दूसरे को पसंद करें यह जरुरी नहीं है, इसलिए जब आप घर पर उसे रखेंगे तो उसे दूसरे पालतू जानवरों के साथ प्यार के साथ रहना सिखाना पड़ेगा। लेकिन एक सावधानी जरुरी है क्योंकि सड़क के कुत्ते जल्दी किसी से घुलते मिलते नहीं है इसलिए हो सकता है उनमें लड़ाई हो इसलिए जरा सावधान रहे।

गुस्सा हर्गिज़ ना करें

डेली रूटीन से इनकी देखभाल करें सड़क के कुत्ते को भी अपने पालतू जानवर की तरह ही प्यार करें और वैसे ही उसकी देख भाल करें। उसे रोज़ नहलाये और साफ़ रखें। उसके ऊपर ज्यादा गुस्सा हर्गिज़ ना करें, नहीं तो वह चिड़चिड़ा भी हो जायेगे।  

निगरानी भी रखा जाता है

शहर में स्ट्रीट डॉग्स को फर्स्ट ऐड के बाद इनको वहाँ की किसी समाज सेवी को निगरानी रखने के लिए सहेज दिया जाता है और संस्था में मेम्बर्स रूटीन में जाकर इनकी दवा करते हैं।  

2012 से काम कर रही संस्था

स्ट्रीट डॉग्स और एनिमल को भोजन, दवा और सेफ्टी पर कचहरी स्थित गोविन्द नगर कॉलोनी की रहने वाली संस्था की सचिव स्वाति बलानी ने 2012 में शुरू किया तब से अब तक बिना किसी समस्या करवा बढ़ता जा रहा है। अब तक अनगिनत डॉग्स को सड़क से लाकर उनकी दवा कर उन्हें ट्रेनिंग दिया गया। अब वही डॉग्स लोगों के घरों में फैमली मेम्बर्स की लाइफ जी रहे हैं। संस्था के मेम्बर्स इन पर पूरे दिन निगरानी भी रखते हैं।