...कहानी बताती है कि कोई ऐसे ही विंग कमांडर अभिनंदन नहीं बनता !

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1st March, 2019, Edited by manish shukla

फीचर्स डेस्क। सुबह के लगभग 9:00 बज रहे थे, आसमान बिल्कुल साफ था लेकिन, सीमा पर युद्ध के बादल नजर आने लगे थे । किसी तूफान के आने से पहले होने वाली खामोशी उन हवाओं में अभिनंदन महसूस कर सकते थे।जांबाज विंग कमांडर अभिनन्दन अपने फाइटर प्लेन में हवा को चीरते आगे बढ रहे थे कि अचानक हवा में ही अभिनंदन को एहसास हुआ कि उनका जेट जल रहा है। फाइटर प्लेन में आग लग चुकी थी और अभिनंदन को जब यह श्योर हो गया कि अब फाइटर प्लेन को ना तो बचाया जा सकता था और ना ही कहीं उसे उतारा जा सकता है तो उन्होंने अपने हमसफर का साथ छोड़ने का फैसला किया।

अभिनंदन पैराशूट के सहारे जमीन की ओर कूद गए और उनके साथ ही विमान भी कुछ दूरी पर जमीन की ओर तेज रफ्तार से गिरने लगा। जिस जगह विमान गिरा वह काश्मीर में नियंत्रण रेखा के बामुश्किल तीन चार किलोमीटर दूर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मुजफ्फराबाद के होरान गाँव का था। जहाज को गिरता देख ग्रामीण जिज्ञासा बस उसकी ओर दौड़े और जहां पर विमान गिरा था वहां पर देखते देखते दर्जनों लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। इधर जमीन पर विंग कमांडर अभिनंदन भी उतर चुके थे । हालांकि उन्हें उस वक्त समझ में नहीं आ रहा था कि वह जिस स्थान पर खड़े हैं वह कौन सी जगह है। वह चारों ओर तेज नजर दौड़ा कर जगह की पहचान करने की कोशिश करने लगे, पर वहां का माहौल और जमीन देख कर वह कश्मीर ही नजर आ रहा था। हालांकि अभिनंदन को थोड़ा शक हुआ कि यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर हो सकता है और संभावना है कि वह दुश्मन के इलाके में आ चुके हैं । मन में आशंका आते ही उन्होंने वहां पास में ही आ चुके कुछ लोगों से पूछा कि वह जगह किस जगह पर इस समय खड़े हैं ।

क्या यह भारत है ? या पाकिस्तान है ? विंग कमांडर की बात सुनकर वहां मौजूद कुछ शातिर पाकिस्तानियों ने जान लिया कि यह भारतीय सेना का कोई पायलट है, जो अब जाल में फस चुका है । ऐसे में इसे बुरी तरह जकड़ना आसान होगा । शातिर युवकों ने बताया कि यह भारत का ही हिस्सा है । यह सुनकर अभिनंदन के मन में आशंका के जो भाव भरे थे, वह दूर हो गए और वह जोश में आकर भारत माता की जय कहते हुए नारे लगाने लगे । उन्होंने सोचा है कि जैकारे का जवाब सामने से भी आएगा और यह वादी पूरी तरह से गूंज आएगी । लेकिन, अभिनंदन गलत थे, उनके नारे लगाते ही वहां आसपास मौजूद उत्पाती युवा दौड़ पड़े और चारों तरफ से अभिनंदन को घेरा जाने लगा। उत्पाती युवको ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू किए तो अभिनंदन को एहसास हुआ कि वह दुश्मन के इलाके में है और इस समय फंस चुके हैं।

अभिनंदन ने खुद को दुश्मनों के हाथ ना लगने देने का दिमाग में ही प्लान तैयार किया और अगले ही पल वह घटनास्थल से दौड़ पड़े । लगभग 1 किलोमीटर तक लगातार अभिनंदन दौडते रहे और उनके पीछे उत्पाती युवक पत्थरों से हमला करते रहे। अभिनंदन ने अपनी पिस्टल निकाली और फायर कर भीड़ को पीछे धकेलने के साथ आगे की ओर भागना जारी रखा। अभिनंदन के पीछे बड़ी संख्या में भीड़ आ चुकी थी और वह पूरी तरह से अभिनंदन पर हमलावर हो चुके थे । पर अभिनंदन में घबराहट नहीं थी, बस वह चाहते थे कि दुश्मन के हाथ में वह ना आये। क्योंकि दुश्मनों के हाथ में आने के बाद देश पर दबाव बनाया जाता । पर थोडी ही देर में अभिनंदन को एहसास हो गया कि भारतीय सीमा यहां से बहुत दूर है और वह ऐसे वहां तक नहीं पहुंच सकेंगे।

अभिनंदन समझ गये कि वह अब बच नहीं पाएंगे। ऐसे में वह वहीं पास में स्थित एक तालाब में कूद गए और फौरन अपनी पहचान वाले दस्तावेजों को नष्ट करने लगे। लेकिन, तब तक स्थानीय लोगों की भारी भीड़ के साथ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन्हें घेर लिया। अभिनंदन के हथियार छीन लिए गए और उनके साथ बहुत बुरी तरीके से मारपीट की जाने लगी। अभिनंदन हर संभव अपना प्रतिरोध करते रहे और सीना ताने डटकर पाक आर्मी के सामने अकेले ही खड़े रहे। अभिनंदन निहत्थे थे और हथियारबंद पाक आर्मी के साथ उपद्रवी भारतीय जवान के साथ वहशीपन का बर्ताव कर रहे थे । लेकिन, सीना ताने अकेले खड़े अभिनंदन भीड़ के सामने किसी चट्टान की तरह डटे रहें और बेखौफ होकर भारतीय खून की गर्मी का एहसास कराते रहें।

शरीर से खून की धारा बह रही थी, अभिनंदन के चेहरे से लेकर शरीर के हर हिस्से पर बेरहमी से वार किया जा रहा था । उन्हें तोड़ने और झुकाने के लिए दबाव बनाया गया और जब अभिनंदन से कुछ खास जवाब पाकिस्तानी जवानों को नहीं मिला तो वह उन्हें सेना के वाहन में भरकर लगभग 50 किलोमीटर दूर भिम्भ्र के सेना केम्प में ले गए। पाकिस्तानियों ने मनोवैज्ञानिक दवाब बनने के लिए रस्ते में भीड़ एकत्र करवाई जो उनकी सेना की जय जयकार और हमारे वीर अभिनन्दन को गालियाँ दे रही थीं। लेकिन, हमारा जवान न घबराया और न ही डरा । मेरी इस पोस्ट को आप काल्पनिकता ना समझियेगा । क्योंकि यह सारी बातें पाकिस्तानी अखबारों में छपी हुई है । वहां के अखबारों ने भारतीय सेना के पायलट को पकड़े जाने की घटनाक्रम का जिक्र किया है। जिसे मैं अपने लफ्जो में आप तक पहुंचा रहा हूं ।

सेना कैंप तक विंग कमांडर अभिनंदन को ले जाने के बाद उनसे पूछताछ का वीडियो, उनके बताने का तरीका यह सब तो लगभग आपने वीडियो में देख भी लिया होगा। हर जगह उनके वीडियो वायरल किये गये हैं। वीडियो में भी अभिनंदन बेबाक निडर होकर पाकिस्तानियों के सवालों का जवाब दे रहे थे और जहां उन्हे लगा किया मेरी देश की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है उन्होंने कोई भी उत्तर देने से साफ इनकार कर दिया। पूरी दुनिया को भारत में संदेश जारी कर दिया कि पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई की है और किस तरह उनके पायलट को पकड़ा गया है। पाकिस्तान पर पूर्व में की गई संधि के अनुसार दबाव बनाया जा रहा है कि अभिनंदन को सुरक्षित वापस किया जाए और बड़ी खबर यह भी है कि कल हमारे विंग कमांडर अभिनंदन वापस हिंदुस्तान आएंगे और पूरा देश उनके अभिनंदन को तैयार है । मैं और पूरा देश अपने शेर की अपने हीरो की वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं वह सकुशल है और सकुशल ही वापस आएंगे । भारत सरकार उन्हें कोई भी सम्मान दे दे वह कम होगा। लेकिन, उन्हें विशिष्ट सेवा पदक से अलंकृत किया जाए यह मेरा निजी विचार है और शायद मेरे साथ पूरे हिंदुस्तान का भी यही मत होगा।

मुझे खुशी है कि पाकिस्तानियों द्वारा पकड़े गए भारतीय जवान को 48 घंटे के अंदर भारत सरकार अपने वतन वापस ला रही है पर थोड़ी सी दिल में कसक इस बात की है कि जब पाकिस्तान के बंदी गृह में वीर अभिनंदन को यातनाएं दी जा रही थी तो उसकी अगली सुबह जिम्मेदार लोग 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' का अभियान चला रहे थे। खैर अभिनंदन के वापस आने पर मैं इसे इतनी तवज्जो नहीं देता। बस मेरे हीरो को मेरा सलाम है।

कंटेंट सोर्स : अमरीश मनीष शुक्ला, प्रयागराज।