लाइलाज बीमारी नहीं है सफेद दाग, आसान है इसका इलाज पढ़े !

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27th April, 2019, Edited by Neeraj tripathi

हेल्थ डेस्क। सफेद दाग, यानी विटिलाइगो (vitiligo) को लेकर तरह-तरह के भ्रम हैं। लोग इसे लाइलाज बीमारी मानते हैं, जबकि डॉक्टरों की मानें तो यह एक कॉस्मेटिक प्रॉब्लम है और इसका इलाज बहुत हद तक मुमकिन है। ऐसे में आज हमारे साथ हैं वाराणसी सिटी के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जे.बी. सिंह जो आपको सफेद दाग को बढ़ने से रोकने और इसे ठीक करने के बारे में बताएगे।  

क्या है सफेद दाग

यह एक ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) शरीर को ही नुकसान पहुंचाने लगती है। इसमें स्किन का रंग बनाने वाले सेल्स मेलानोसाइट (Melanocyte) खत्म होने लगते हैं या काम करना बंद कर देते हैं, जिससे शरीर पर जगह-जगह सफेद-से धब्बे बन जाते हैं। यह समस्या मोटे तौर पर लिप-टिप यानी होठों और हाथों पर, एक्रोफेशियर यानी हाथ-पैर और चेहरे पर, फोकल यानी शरीर में एक-दो जगह पर, सेग्मेंटल यानी शरीर के एक पूरे हिस्से पर और जनरलाइज्ड यानी शरीर के कई हिस्सों पर दाग के रूप में सामने आती है।

इसके होने के ये हैं वजहें

1. फैमिली हिस्ट्री, यानी अगर पैरंट्स सफेद दाग से पीड़ित रहे हैं तो बच्चों में इसके होने की आशंका रहती है। हालांकि ऐसे मामले 2 से 4 फीसदी ही होते हैं।

2. एलोपेशिया एरियाटा (Alopecia Areata) यानी वह बीमारी, जिसमें छोटे-छोटे गोले के रूप में शरीर से बाल गायब होने लगते हैं।

3. सफेद दाग मस्से या बर्थ मार्क (Halo Nevus) से मस्सा या बर्थ मार्क बच्चे के बड़े होने के साथ-साथ आसपास की स्किन का रंग बदलना शुरू कर देता है।

4. केमिकल ल्यूकोडर्मा (Chemical Leucoderma) यानी खराब क्वॉलिटी की चिपकाने वाली बिंदी या खराब प्लास्टिक की चप्पल इस्तेमाल करने से।

5. ज्यादा केमिकल एक्सपोजर यानी प्लास्टिक, रबर या केमिकल फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों को खतरा ज्यादा। कीमोथेरपी से भी इसकी आशंका रहती है।

6. थाइरॉयड संबंधी बीमारी होने पर।

कैसे पहचानें इसे

अगर स्किन का रंग हल्का होने लगे और उस हिस्से के बाल भी सफेद होना शुरू हो जाएं तो समझिए कि सफेद दाग है। हालांकि इन दागों पर कोई खुजली या दर्द नहीं होता और संवेदनशीलता भी बनी रहती है, लेकिन पसीने और ज्यादा गर्मी की स्थिति में जलन पैदा हो सकती है। अगर सफेद दाग पर बाल काले रहें तो इलाज की गुंजाइश ज्यादा होती है। अगर दाग के ऊपर लगा स्क्रेच या घड़ी पहननेवाली जगह आदि भी सफेद होने लगे तो समझिए कि समस्या बढ़ रही है। अगर इसे बिल्कुल शुरुआती दौर में पकड़ना चाहते हैं तो हल्का-सा भी दाग होने पर डॉक्टर के पास जाएं। लोग अक्सर इसे कैल्शियम या आयरन की कमी से पैदा हुई समस्या मानकर इग्नोर कर देते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। 

क्या है इलाज

सफेद दाग के इलाज के लिए दो तरह की दवाएं दी जाती हैं। सफेद दाग को रोकने वाली और स्किन कलर वापस लाने वाली। इनमें भी खानेवाली और लगानेवाली, दो अलग-अलग तरह की दवाएं दी जाती हैं।

कितना लग सकता है आपका खर्च

मोटे तौर पर 1200-1500 रुपये हर महीना खर्च आता है। बीमारी के ठीक होने में कितना वक्त लगेगा, यह प्रभावित हिस्से और उसकी गहनता पर निर्भर करता है। जितना जल्दी इलाज के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाएंगे, उतना बेहतर रहेगा।

आयुर्वेद लुकोडेर्मा ट्रीटमेंट 

आयुर्वेद के अनुसार, पित्त दोष की अधिकता की वजह से ये रोग होता हैँ, आयुर्वेद मे 5 प्रकार के पित्त दोष माने गये हैँ, भ्राजक पित्त के imbalance होने की वजह से  होता हैँ । जो लोग बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार, बेवक्त खाने के अलावा विरुद्ध आहार (मसलन दूध के साथ नमक या मछली आदि) लेता है, उसमें यह समस्या होने की आशंका ज्यादा होती है। आयुर्वेद में पंचकर्म के जरिए शरीर को डिटॉक्सिफाई किया जाता है। इसके अलावा बाकुची बीज, खदिर (कत्था), दारुहरिद्रा, करंज, आरग्यवध (अमलतास) आदि सिंगल हर्ब्स के जरिए भी खून को साफ किया जाता है। इसके अलावा कंपाउंड मेडिसिन भी दी जाती हैं जैसे कि गंधक रसायन, रस माणिक्य, मंजिष्ठादी क्वाथ, खदिरादी वटी आदि हैं। त्रिफला भी काफी असरदार है।

सफ़ेद दाग से कैसे बचे

खट्टी चीजें जैसे नीबू, संतरा, आम, अंगूर, टमाटर, आंवला, अचार, दही, लस्सी, मिर्च, मैदा, गोभी, उड़द दाल आदि कम खाएं। गर्मी बढ़ाने वाली चीजें न खाएं। नॉनवेज और फास्ट फूड कम खाएं। सॉफ्ट डिंक्स के सेवन से बचें।

1.नमक, मूली और मांस-मछली के साथ दूध न पीएं।

2.लंबे समय तक तेज गर्मी के एक्सपोजर से बचें।

मिथ मंथन

मिथः कैंसर की वजह बन सकता है यह।

सचः नहीं, यह कैंसर की वजह नहीं बनता और इसमें जान को भी कोई खतरा नहीं है।

मिथः यह एक तरह का कोढ़ है।

सचः इसका कोढ़ (लेप्रसी) से भी कोई लेना-देना नहीं है। यह सिरोसिस (Psoraisis) भी नहीं है। सिरोसिस में स्किन पर लाल धब्बे बनते हैं, न कि सफेद।

मिथः अल्बीनिज़म और सफेद दाग एक ही हैं।

सचः कुछ लोगों का पूरा शरीर उजला होता है क्योंकि उनके शरीर में रंग बनाने वाले कण जन्म से ही पूरी तरह नदारद होते हैं। इन्हें अल्बीनो और उनकी बीमारी को अल्बीनिज़म कहा जाता है। यह बीमारी वंशानुगत और लाइलाज है, जबकि सफेद दाग का इलाज मुमकिन है।

ध्यान दें

सफेद दाग हैं तो तेज केमिकल वाले साबुन और डिटर्जेंट के इस्तेमाल से बचें। साथ ही परफ्यूम, डियोड्रंट, हेयर डाई, पेस्टिसाइड्स को शरीर के सीधे संपर्क में आने से बचाएं। तेज केमिकल एक्सपोजर से सफेद दाग फैलता है। अपने को कुछ अलग न समझें। सफेद दाग होने पर न तो उस शख्स की काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है और न ही किसी और तरह की दिक्कत पेश आती है। सफेद दाग से प्रभावित शख्स किसी भी आम इंसान की तरह ही होता है।

कंटेंट सोर्स : डॉ. जे.बी. सिंह (सीनियर आयुर्वेद कंसल्टेंट्स), वाराणसी सिटी।