भारत तो इलाज कर रहा है......

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11th August, 2019, Edited by manish shukla

सुरेंद्र किशोर
नब्बे के दशक में चर्चित व घृणित जैन हवाला कांड हुआ था। जो जैन बंधु भारत विरोधी विदेशी ताकतों से पैसे लेकर, कश्मीर के आतंकियों को पहुंचाते थे,उसी जैन बंधुओं ने  उसी पैसों में से इस देश के 115 बड़े नेताओं और नौकरशाहों को भी भारी रकम तब दी थी।लाभुकों में भारत के एक पूर्व राष्ट्रपति ,दो पूर्व प्रधान मंत्री, कई पूर्व मुख्य मंत्री व पूर्व-वत्र्तमान केंद्रीय मंत्री स्तर के अनेक नेता शामिल थे।वह बहुदलीय घोटाला था। पैसे पाने वालों में खुफिया अफसर सहित 15 बड़े बड़े अफसर भी थे । आरोप लगा था कि पैसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई.एस.आई.ने भिजवाए थे। जिस घोटाले में लगभग सभी प्रमुख दलों के बड़े नेता लिप्त हों,उन्हें सजा कैसे होगी ? नहीं हुई। जबकि इन लाभुक नेताओं में से कुछ ने इसके एवज में देशद्रोहियों की मदद भी की थी।ऐसा विवरण इंडिया टूडे में तब छपा भी था। अब बताइए कि कश्मीर के आतंकियों ने इस देश की राजनीति की नैतिकता पर कितना मारक असर डाला। जिन नेताओं ने पैसे लिए थे,वे तब की राजनीति के हू इज हू थे।

             इतना ही नहीं,कश्मीर में सक्रिय देसी -विदेशी जेहादी जमातें कश्मीर को अपना लांचिंग पैड बना कर भारत के बाकी हिस्सों में भी जेहादी तत्वों को मजबूत करते जा रहे हैं। इस समस्या की चर्चा कभी इस देश के एक खास विचारधारा के तथाकथित बुद्धिजीवी व राजनीतिक नेतागण नहीं करते। जबकि इस संबंध में ठोस खबरें अखबारों में भी आती भी रहती हैं।यह किसी देश के लिए अधिक खतरनाक स्थिति है। जेहादी तत्वों की सक्रियता में कश्मीर में दिनानुदिन वृद्धि का सबसे बड़ा कारण रहा है धारा- 370 और 35 ए। ऐसे ही हालात में चीन सरकार अपने शिगजियांग प्रांत में जेहादियों का ‘पक्का इलाज’ कर रही है। 
           भारत ने तो कश्मीर में उनके इलाज की शुरुआत भर की है।मात्र इसी पर देसी-विदेशी जेहाद पक्षियों की बेचैनी तो देखिए ! अब भारत सरकार के समक्ष दो ही विकल्प है। या तो वह कश्मीर को आजाद कर दे।यह काम तो कोई सरकार कर ही नहीं सकती।पर यदि ऐसा हुआ तो नतीजतन कश्मीर एक और सिरिया - इराक बन जाएगा। खबर है कि अफगानिस्तान में अमेरिका तालिबान के समक्ष ‘आत्म समर्पण’ करने ही जा रहा है। जेहादी कर्म व मन वाले स्वतंत्र कश्मीर, पाकिस्तान व अफगानिस्तान  फिर भारत के साथ क्या सलूक करेंगे,इसकी कल्पना कितने लोगों को यहां है ?  दूसरा विकल्प यह है कि भारत सरकार कश्मीर में ही जेहादियों से लड़ ले।चाहे जो नतीजा हो। उसके लिए जरूरी है कि कश्मीर को पुनर्गठित करके वहां अनुकूल राजनीतिक व अन्य भौतिक स्थिति तैयार कर ली जाए। याद रहे कि कश्मीर में जो देसी -विदेशी आतंकवादी युद्धरत हैं,वे जेहाद से कम कुछ भी नहीं चाहते हैं। अफगानिस्तान में पहले सोवियत संघ की पराजय और अब अमेरिका की संभावित पराजय से जेहादियों का मन बढ़ गया है।खबर है कि उनकी नजरें अब पूरे भारत पर है। अब सोचना है इस देश के देशभक्त लोगों को।
      खुशी की बात यह है कि राजग के अलावा भी कुछ दूसरे संगठनों के नेतागण भी कश्मीर समस्या की गंभीरता को सही परिप्रेक्ष्य में समझने लगे हैं।