"पापा बोलिए न"

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16th June, 2019, Edited by Admin

पापा मिटा दे जो आपकी यादें 

बोलिए वो जिगर कहाँ से लाऊं 

पापा आपसे होकर दूर 

बोलिए मैं कैसे न बिखर जाऊं 

जब कभी आती हैं आपकी याद 

मैं भागती हूँ इस सच से

कि आप अब नहीं रहे हमारे बीच 

आप दूर बहुत चले गये सबसे 

पर पापा आप ही आप आते है नजर

मैं जिधर जाऊं 

कहते थे आप मत ढूँढो सहारा किसी में 

खुद को बनाओ इस काबिल 

हंसी बिखर जाए वहां मैं जिधर जाऊं 

पर पापा जीना भी सीखना पड़ता है 

ये तो बताया ही नहीं आपने

समझौतों भरे जीवन में 

हंसना भूल गयी हूँ मैं 

माता पिता के बाद कोई नहीं करता है प्यार 

इस बात से बोलिए कैसे मुकर जाऊं 

"पापा"

जब कभी भी जीवन के संघर्षों से 

बहुत थक जाती हूँ मैं !!

तब  ,

आती है आपकी बहुत बहुत याद 

जी करता है भले आपको न देख पाऊँ 

पर सुन सकूं आपकी आवाज़ 

सिर्फ और सिर्फ एक बार 

पर फिर आपकी तस्वीर पर टंगे हार को देखकर 

जीवन के भयानक सच से हो जाती हूँ रूबरू 

और हो जाता है जीवन शून्य !!

"पापा बोलिए न "

एक बार सिर्फ और सिर्फ एक बार 

आपसे लेने मैं आशीष

बताने कि संघर्षों ने छीन लिया मेरा बचपना

बताने कि कितना कुछ छीन लिया जमाने ने

बताने कि बहुत थक गयी हूँ मैं 

सुनने आपसे वो शब्द 

मत डरना आगे बढो मैं हूँ तुम्हारे साथ !!

पापा अब नहीं देता है कोई साथ 

न ही बढने देता है आगे

जो करना चाहू अपने मन की नहीं करने देता है कोई 

पापा करने ढेर सारी बातें 

और बटोरने ढेर सारा हौसला

और आपके हाथों का अपने सर पर स्पर्श 

"पापा बोलिए न"

 आपसे मिलने मैं किधर आऊं !!

रूबी प्रसाद, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल).