खत्म होने जा रहा है 154 वर्ष पुराना इलाहाबाद बैंक, जानिये ब्रितानिया हुकूमत में कैसे हुई थी शुरूआत

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1st September, 2019, Edited by manish shukla

इलाहाबाद / प्रयागराज । बैंकिंग सेक्टर में खुद को बेहतरीन ढंग से स्थापित करने वाले देश के राष्ट्रीय बैंकों में से एक  "इलाहाबाद बैंक"  बस कुछ दिनों का मेहमान है। इसकी पहचान खत्म होने वाली है। इलाहाबाद बैंक का विलय होने जा रहा है। जिससे इस बैंक का नाम, पहचान सबकुछ इतिहास के पन्नो में कैद होकर रह जायेगा। देश के कोने-कोने और विदेशों तक में अपनी सेवाएं दे रहे इलाहाबाद बैंक की शुरुआत ब्रितानिया हुकूमत में एक छोटे से कमरे में हुई थी। यूरोपीय व्यापारियों की अगुवाई में भारतीय व्यापारियों ने इस बैंक की आधारशिला रखी थी। चूंकि इलाहाबाद तत्कालीन समय में ब्रिटिश सरकार की विशेष निगरानी में रहता था और प्रिंस चार्ल्स के इलाहाबाद आने से पहले इस बैंक को पूरी तरह से संचालित कर इसे उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया था। इसलिये इस बैंक को ब्रिटिश सरकार में विशेष संरक्षण भी मिलता रहा। हालांकि अब देश की इकोनॉमी में आई सुस्ती को दूर करने के लिए मोदी सरकार ने इस बैंक पर विलय का हंटर चलाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इलाहाबाद बैंक के विलय का ऐलान किया। जिससे 154 वर्ष पुराने इस बैंक के स्वर्णिम इतिहास का सफर भी थम गया। फिलहाल इस समय जब प्रयागराज शहर से लगातार मुख्यालयों के ट्रांसफर का क्रम चल रहा था, ऐसे में शहर की दुनिया भर में पहचान से जुडा यह बैंक जाने से शहरियों में प्रखर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं।

ऐसे हुई थी शुरूआत 
इलाहाबाद बैंक की शुरूआत तत्कालीन ब्रिटिश भारत के इलाहाबाद प्रेसीडेंसी में हुई थी। इसकी शुरुआत कुछ स्थानीय व्यापारी वा यूरोपीय व्यापारियो ने मिलकर की थी। बिल्कुल छोटी सी रकम से यह बैंक सबसे पहले एक कमरे में खुला था, जो चौक इलाके में था । यह कमरा व्यापारी बच्चा जी का था। उन्होंने कमरे के साथ भवन का अगला हिस्सा भी बैंक संचालित करने के लिए दे दिया था। प्रथम तल के एक कमरे में  यह बैंक धीरे धीरे पूरे इलाहाबाद में प्रसिद्ध हो गया और इलाहाबादियों के लिये बेहतरीन विकल्प बन गया । एक से दो दशक तक बैंक का काम काज यही बही खाते में यही चलता रहा। लेकिन, ग्राहकों की बढती संख्या के बाद इस बैंक को विस्तार देने की प्रक्रिया शुरू हुई।   24 अप्रैल 1865 को बैंक को सिविल लाइंस स्थिति मौजूदा हेड शाखा में स्थानांतरित किया गया। जो लंबे समय तक इलाहाबाद बैंक का मुख्यालय रहा । इसके बाद बैंक के पुराने भवन में एक ऊन भंडार की दुकान खुली, जिसे आज टंडन ऊन भंडार के नाम से लोग जानते हैं। 1865 में विधिवत शुरुआत के साथ देश में भी बैंकिंग का आधिकारिक शंखनाद हुआ और लोग बैंक से रूबरू होने लगे। 

19 वीं शताब्दी में गूंजा नाम
काफी लंबे समय तक इलाहाबाद में अपनी पहचान स्थापित करने के बाद 19वीं सदी में इस बैंक ने अपना विस्तार शुरू किया है और देखते ही देखते इलाहाबाद बैंक की शाखा झांसी, कानपुर, लखनऊ, बरेली, नैनीताल, कोलकाता तथा दिल्ली में शुरू हो गई। इलाहाबाद बैंक की भर्ती पापुलैरिटी का पूरे देश में इसके विस्तार के क्रम में इलाहाबाद से बैंक का मुख्यालय भी शिफ्ट कर दिया गया इसके बाद सबसे बड़ा परिवर्तन आयरन लेडी के नाम से मशहूर इंदिरा गांधी सरकार के दौरान हुआ। इंदिरा गांधी ने 13 बैंकों के राष्ट्रीयकरण का ऐलान किया और उस ऐलान में इलाहाबाद बैंक का भी नाम शामिल था और यहीं से यह तय हो गया कि अब इलाहाबाद बैंक एक आम बैंक नहीं रहेगा।  इसके बाद बैंक की शाखाएं पूरे देश में खोली जाने लगी। 2006 में इलाहाबाद बैंक की चीन में भी एक शाखा खुली और फिर हांककांग जैसे स्थानों पर भी बैंक की शाखा खुली और इसके विस्तार का क्रम जारी था। परन्तु अब उस पर विराम लग गया है ।

कितनी शाखा और कर्मचारी 
इस समय इलाहाबाद बैंक की 3229 शाखाओ में  23210 कर्मचारी हैं जबकि 1,112 एटीएम हैं। अकेले प्रयागराज शहर की बात करें तो यहां इसकी 16 शाखा है। जबकि  इलाहाबाद जोन में कुल 57 शाखाएं हैं। वहीं, बैंक का वर्तमान में कुल कारोबार 3 लाख 77 हजार 887 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुका है।  हालांकि पिछले कुछ समय से  इलाहाबाद बैंक घाटे के दौर से गुजर रहा था और सरकार की इस पर निगाह बनी हुई थी। सरकार की ओर से संकेत और औपचारिक संदेश भी दे दिया गया था। जिसके बाद से बैंक पर  मर्जर की दो धारी तलवार लटक रही थी। हालांकि बैंक ने अपना घाटा खत्म करने और पूंजी बढ़ाने के लिये  बैंक की संपत्तियों को बेचना शुरू किया था। आलम यह था कि अपनी सबसे पुरानी भूमि यानी प्रयागराज के सिविल लाइंस शाखा के जमीन को भी बेचने का ऐलान बैंक को करना पड़ा ।बैंक ने इलाहाबाद समेत पैडर रोड मुंबई और अंधेरी, बरेली, झांसी, नैनीताल, मंसूरी, लखनऊ, सीतापुर, मुरादाबाद, गोरखपुर, जबलपुर में बैंक की जमीन बेचने की घोषणा की।  जिसके बाद यह लगभग तय था कि बैंक का मर्जर अब नहीं होगा। लेकिन, देश में मंदी का असर बढने का खामियाजा आखिर कर देश के इस पुराने बैंक को उठाना पडा।

क्या है घोषणा 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 10 सरकारी बैंकों का विलय का ऐलान किया। जिसके अनुसार अब पंजाब नेशनल बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक, केनरा बैंक, सिंडिकेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक, इलाहाबाद बैंक का विलय होगा। इसमे इलाहाबाद बैंक का विलय  इंडियन बैंक में होगा। इस विलय के साथ 27 पब्लिक सेक्टर बैंक की जगह अब सिर्फ 12 पब्लिक सेक्टर बैंक होंगे।