...जब कुंडली में बनते हैं ये योग, तब पुरुष बनाता है महिला से ऐसे संबंध !

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4th July, 2019, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से जीवन की छोटी से लेकर बड़ी सच्चाई तक जानी जा सकती है। यहां तक की अवैध संबंध जैसे विषय पर भी स्पष्टता मिलती है। चन्द्रमा मन का कारक होता है और कामवासना मन से जागती है। लग्न व्यक्ति स्वयं होता है पंचम भाव प्रेमिका और सप्तम भाव पत्नी का होता है एवं शुक्र भोग विलास का कारक है। शनि, राहू, मंगल और पंचम भाव, पंचमेश, द्वादश और द्वादशेष का आपस में संबंध होना जातक के विवाह पूर्व एवं पश्चात् अवैध संबंध स्थापित करवाते हैं। जन्म कुंडली में सप्तम भाव पर शनि की चन्द्रमा के साथ युति जहां जातक को मानसिक रूप से पीड़ित करती है, वहीं प्रेम संबंध भी करवाती है। कुछ ऐसे ज्योतिषीय योग होते हैं, जिनके जन्म कुंडली में होने से, जातक के अवैध संबंधों और कामुक होने का संकेत मिलता है ...

जन्म कुंडली में शनि और शुक्र की युति, वैवाहिक जीवन में किसी अन्य का आना बताती है। पंचम भाव में शनि, शुक्र और मंगल की युति अवैध संबंध का निर्माण करती है। मेष या वृश्चिक राशि में मंगल के साथ शुक्र के होने से पराई स्त्री से घनिष्ठता बनती है। जन्म कुंडली में चन्द्रमा से द्वितीय स्थान में शुक्र हो तो 'सुनपफा योग' बनता है ऐसा जातक भौतिक सुखों की प्राप्ति करता है। उसका सौन्दर्य आकर्षक होता है अन्य स्त्रियों से शारीरिक संबंध की प्रबल संभावना होती है। 

द्वितीय, छठे और सप्तम भाव के किसी भी स्वामी के साथ शुक्र की युति लग्न में होने से जातक का चरित्र संदेहस्पद होता है। सूर्य और शुक्र की युति मीन लग्न में होने से जातक को अत्यंत कामुक बनाती है उसका अवैध संबंध बनता है तथा ऐसे जातक की कामवासना की तृप्ति शीघ्र नहीं होती। बुध और शुक्र की युति यदि सप्तम भाव में हो तो जातक अवैध संबंध के लिए नए-नए तरीके अपनाता हैं। शनि, मंगल और शुक्र का काम वासना से घनिष्ठ संबंध है। 

यदि जन्म कुंडली में शनि और मंगल की युति सप्तम भाव पर हो तो जातक समलिंगी होता है। यही युति यदि अष्टम, नवम, द्वादश भाव पर हो तो जातक का अपने से बड़ों से अवैध संबंध होता हैं। मंगल और राहू की युति अथवा दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक कामुक होता है एवं अवैध संबंध बनाने के लिए उसका मन भटकता है। चतुर्थ, सप्तम, दशम भाव में गुरु पर मंगल शुक्र का प्रभाव और चन्द्रमा पर राहू का प्रभाव हो तो व्यक्ति अवैध संबंध बनाने के लिए सभी सीमाओं का उल्लघंन कर देता है।

लग्न में शनि का होना जातक की कामवासना बढ़ा देता है, पंचम भाव में शनि होने से अपने से बड़ी स्त्रियों के प्रति अवैध संबंध बनाने के लिए जातक को आकर्षित करता है। शनि का सप्तम भाव में चन्द्रमा के साथ होना और मंगल की दृष्टि पडऩे से जातक वेश्यागामी होता है। इसी योग में अगर शुक्र का संबंध दृष्टि अथवा युति से बन जाए तो अवैध संबंध निश्चित हो जाता है। 

चन्द्रमा जन्म कुंडली में कहीं पर भी नीच का होकर बैठा हो और उस पर पाप प्रभाव हो तो जातक अपने नौकर/नौकरानी से अवैध संबंध बनाता है, यही चन्द्रमा अगर दूषित होकर नवम भाव में स्थित हो तो जातक अपने गुरु अथवा अपने से बड़ों के साथ अवैध संबंध बनाता है।

मंगल रक्त को दर्शता है। जन्म कुंडली में किसी पाप ग्रह के साथ मंगल की युति सप्तम भाव में हो या सूर्य सप्तम में और मंगल चतुर्थ स्थान में हो अथवा चतुर्थ भाव में राहू हो तो व्यक्ति कामुकता में अंधा होकर पशु समान कार्य करता है। राहू का अष्टम भाव में होना जातक से अवैध संबंध कराता है। तुला राशि में चार ग्रह एक साथ होने से जातक के परिवार में क्लेश उत्पन्न होते हैं जिसके कारण जातक बाहर अवैध संबंध बनाता है। 

शनि का दशम भाव में होना जातक के मन में विरोधाभास उत्पन्न करता है। शुक्र और मंगल की युति जन्म कुंडली में कहीं पर भी हो एवं शनि दशम भाव में हो तो जातक ज्ञानवान भी होता है एवं कामवासना तथा अवैध संबंधें को गंभीरता से लेता है।

 उसका मन स्थिर नहीं रह पाता, कभी ज्ञानी बन जाता है और कभी अवैध संबंध का दास। सूर्य का सप्तम भाव में होना जातक के वैवाहिक जीवन में कलेश उत्पन्न करता है। इससे परेशान होकर जातक अवैध संबंध बनाता है। सप्तम भाव में राहू और शुक्र हो अथवा राहू और चन्द्रमा की युति हो तथा गुरु द्वादश भाव में स्थित हो तो विवाह पश्चात कार्यालयों में ही अवैध-संबंध बनते हैं।

कंटेंट सोर्स : ज्योतिषाचार्य ओम, बिलासपुर।