घर परिवार में बुजुर्गों का महत्व

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31st January, 2019, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। बुजुर्गों का साथ औऱ समझाइश अपने स्तर पर बहुत जरूरी होती है दादा दादी या नाना नानी का असर समभाग बच्चो पर आता ही है। सबसे महत्वपूर्ण है उनका बच्चो के साथ या बच्चो का उनके साथ रहना लेकिन बदले हुए परिवेश में उनसे बच्चो को दूर रखा जाने लगा है और अपनी सफाई में माता पिता कई बहाने गढ़ लेते है,  कौन ऐसा पिता होगा या माँ होगी जो पोते-पोतियों से दूर रहना चाहेगी शायद गिनती में बहुत कम निकले परन्तु आज काबुजुर्ग दम्पति विवश है घरेलू कारणों से जिसे आप झुटला नही सकते। माँ-बाप से अलग रहकर उनके साथ एडजेस्ट न करके लोग अपने बच्चों के सम्पर्क सूत्र का भी कत्ल करते जा रहे है औऱ आगे कभी माँ बाप उनके पास महीने दो महीने रहने आ जाएं तो बड़ी बेशर्मी से कहते है की यही लोग नही रहते हमारे पास हम तो कितना कहते है इससे वंचित होता जा रहा है।

हमारा बच्चा वर्ग पोते-पोतियों का हाथ थामकर बुजुर्ग-खुद को फिर से ऊर्जा से भरा हुआ पाते है साथ ही बच्चों को स्नेह का मूल्यसमझ आता है बच्चे अपने बड़ों से ज्यादा सीखते है। जीवन में  सबक के बारे में  किताब से नहीं बल्कि अपने दादी-नानी से ही सीख सकते है। बड़ों का सम्मान, छोटो से प्यार सब बातें, उनके बड़े ही उनको सीखाते है आसपास का माहौल बनाकर। इतना ही नहीं अपने रीति-रिवाजों और संस्कृति का भी पता बुजुर्ग से हीचलता है इंटरनेट पर दादी-नानी की कहानियां आजकल ढेरों मिल जाएंगी, लेकिन असली मजा गोद में ही सुनने से  है। आज के मॉर्डन वक़्त में बच्चों की सोच और उनका बड़ो के प्रति प्यार गुम होता जा रहा है  इसके  जिम्मेदार हम ही है।

अगर आप बच्चों पर संस्कारों और विचारों की पगड़ी बांध कर रखे तो जाहिर है बच्चे इनको सहन क्यों करेंगे इसलिए आज के बदलते परिवेश में खुद में बदलाव लाना जरूरी है बच्चों को किसी चीज के बारे में समझाने के लिए बच्चे की पहली पाठशाला घर ही है। शुरूआत घर के बुजुर्गों से ही होती है। दादा-दादी और नाना-नानी के बिना बचपन खाक है क्योंकि वही परिवार और संस्कारों नींव डालते है लेकिन आज के दौर में सब कुछ बदलता जा रहा है। लेकिन बड़ों की कमी महसूस होती है क्योंकि बच्चों के विकास में इनकी सबसे बड़ी भूमिका होती है। हर बचपन को तराशने में बड़े बुजुर्ग ही साथ देते है दादा दादी का अनुभव व उनकी समझ माता पिता से कहीं ज्यादा  हैं ज़िन्दगी का काफी अनुभव उनके पास हैं, जिसे वे अपने पोते पोतियों को देते रहते है बच्चे भी  उनसे खुलकर बात करते वक़्त झिझकते नही हैं  जिंदगी में बहुत कुछ जो झेला होता हैं वह भी औऱ मुश्किल चीजों का हल अपने अनुभव से चुटकियों में कर देते हैं। जिससे बच्चे भी सीखते है

सयुंक्त  परिवार में बच्चों के रहने के फायदे

बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं दादा दादी से परिवार का इतिहास भी बहुत मूल्य रखता है क्योंकि अपने परिवार के बारे में  जानकारी आपको नही है जितनी दादा-दादी को होती हैं इसलिये वे बच्चो से उन सबके बारे में बात करते हैं, उन्हें सभी रिश्तेदारों व पुरखो का बताते हैं इससे आपके बच्चे में रिश्तो को लेकर समझदरी भी आती है साथ ही उनको निभाया कैसे जाता हैं, ये भी समझ आने लगता है। संस्कार पैर छूना या किसी से मिलने पर उसे नमस्ते कहना, भगवान का शुक्रिया अदाकरना, सबसे प्यार से बात करना ऐसी कई बातें हैं जो दादा-दादी बच्चो को बहुत अच्छे से सिखा पाते है. धैर्य आजकल के बच्चो व माता-पिता में भी धैर्य बहुत कम हैं  टेक्नोलॉजी ने दुनिया बहुत तेज़ कर दी हैं और सभी को हर चीज़ जल्दी है बस जल्दी बैचेन हो उठते हैं सब ऐसे समय में हमारे बुजुर्ग इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं किकैसे वो किसी भी अवस्था में धैर्यवान होते हैं क्योंकि शांत मन की बात वही सिखाते है।

कंटेंट सोर्स : मनु, पंजाब।