national youth day special: गांव का यह लड़का हर महीने कमाता है 100 करोड़ रूपये

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11th August, 2019, Edited by manish shukla

अमरीश मनीश शुक्ल

स्पेशल स्टोरी डेस्क : आज हम आपके लिये एक ऐसी सक्सेज स्टोरी लेकर आये हैं, जो आपके सोंचने, समझने और कुछ करने का पूरा नजरिया बदल देगी। यह भारत एक ऐसे युवा की कहानी है, जो अपनी नौकरी छोड़कर कोचिंग खोलता है। मात्र 2 लाख रूपये से खुली उसकी कोचिंग अब 100 करोड रूपये की मंथली इनकम दे रही है और उस युवा ने 1 हजार लोगों को अपनी कंपनी में रोजगार भी दे दिया है। इस युवा की कंपनी इस वक्त देश का सबसे बड़ा ऑनलाइन एजुकेशन कंटेट उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म बन चुका है।  केंद्र सरकार से लेकर बडे बडे ब्रांडों द्वारा इन्हें पुरस्कृत किया जा रहा हैं। यह कहानी है ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे बायजूज रविंद्रन की। केरल के एक छोटे से गांव से निकले इस युवा की कहानी अब पूरी दुनिया देख और सुन रही है। जिन्होंने बिजनेस के मामले में इस वर्ष 1400 करोड़ रूपये की वार्षिक कमाई का लक्ष्य रखा है। 

बायजू रविंद्रन का सफर 

बायजू रविंद्रन की शुरुआती शिक्षा केरल के किन्नूर जिले में एक छोटे से गांव अझीकोड से प्रारंभ हुई। इसके बाद उन्होंने कालीकल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग पूरी की और फिर एक शिपिंग कंपनी में नौकरी कर ली। नौकरी के दौरान वह अपने कुछ दोस्तों को एमबीए के एग्जाम की तैयारी में मदद करने लगे और उन्हें अपने साथियों को पढाने में बहुत ही मजा आना लगा। दोस्तों को बायजू की स्किल और समझाने का तरीका बेहद ही अनोखा लगता और उसका परिणाम उससे भी शानदार था । दोस्तों ने ही बायजू को कोचिंग शुरू करने की सलाह दी और फिर यहीं से सफर शुरू हुआ रविंद्रन के असली सफर का। रविंद्रन ने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने पास रही 2 लाख की पूंजी से कोचिलंग खोल ली। 2011 में बायजू नाम से अपना स्टार्टअप तैयार किया और आन लाइन पढाने का ऐसा रोचक तरीका खोजा, जिसने मौजूदा समय में इस कंपनी की सालाना कमाई 260 करोड़ रुपए पहुंचा दी है। 

ऐसे बढ़ा ग्राफ 

रविंद्रन ने 8 साल पहले अपने दोस्तों के कहने पर 2 लाख रूपये का निवेश अपनी कोचिंग में किया था और जब उन्होंने कंपनी बनाई तो 2011-12 में उनकी कंपनी का रेवेन्यू 4 करोड़ रुपए पहुंच गया था। इसके बाद रविंद्रन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर साल दुगनी तेजी से यह आंकड़ा बढता रहा। 2012-13 में यह आंकड़ा बढ़कर 12 करोड़, 2013-14 में बढ़कर 20 करोड़ पहुंच गया। लेकिन यह क्रम आगे भी जारी रहा 2014-15 में उनकी कंपनी का रेवेन्यू 48 करोड़ और 2015-16 में 120 करोड़ रुपए हो गया। यह 2016-17 में उनकी कंपनी का रेवेन्यू 260 करोड़ रुपए हो गया। वहीं 2017—18 में उनका प्रति महा का रेवन्यू 100 करोड रूपये को पार कर चुका है और बतौर रिवंद्रन 2018-19 में उनका वार्षिक रेवन्यू 1400 करोड़ तक पहुंच जायेगा। 

बच्चों को पसंद है पढाई 

रविंद्रन बायजूज कैट की ट्रेनिंग व बच्चों को मैथ्स और साइंस की पढ़ाई दिलचस्प तरीके से पढाते हैं, जिसमें फुल टेक्नालाजी का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल होता है। यानी बच्चे पढते नहीं बल्कि सबकुछ महसूस करते हैं और अपनी आंखों से देखकर उसे आसानी से समझ जाते हैं। देश के अलावा अब वे विदेशों में बेहद तेजी के साथ अपना बिजलेस फैला रहे हैं। हालांकि यह तो खुद बायजू रविंद्रन को भी नहीं पता था कि उनकी कोचिंग खोलना का आईडिया एक दिन उन्हें ऐसा मुकाम देगा, जिसकी लोग कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। आप इस ब्रांड के बारे में बस इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि इंडिया की सबसे बड़ी एडटेक कंपनी बन Byju’s कंपनी का विज्ञापन शाहरुख खान करते हैं। 

ऑनलाइन टीचिंग ने बदली जिंदगी 

स्टार्टअप के बाद रविंद्रन ने फुल टाइम ऑनलाइन टीचिंग प्रोग्राम शुरू किया और पापुलर होने पर उनकी डिमांड बहुत अधिक बढने लगी। वह कयी शहरों में जाकर क्लास लेते और उसके बदले उन्हें अच्छे पैसे मिलते। इसी बीच रविंद्रन ने एक ही जगह से पूरे हिंदुस्तान में पहुंचने का प्लान बनाया और पहली बार 2009 में कैट के लिए ऑनलाइन वीडियो बेस्ड लर्निंग प्रोग्राम शुरू कर दिया। बस यही वह आइडिया था जिसने रविंद्रन की जिंदगी को बदल कर रख दिया। 2011 में रविंद्रन ने बायजू नाम से कंपनी शुरू की। बाद में उन्होंने Byju’s - द लर्निंग एप लॉन्च के सहारे हर मोबाइल यूजर तक अपनी पहुंच बनानी शुरू की और यह इनकी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट या कहें कि गेम चेंजर साबित हुआ। जितनी तेजी से तेज में स्मार्टफोन की मांग बढी उसी तेजी से रविंद्रन का ऐप भी लोकप्रिय हो गया। 

अब बरस रहा पैसा 

रविंद्रन बताते हैं कि इन समय उनकी कंपनी से जुड़े छात्रों की संख्या 2 करोड़ के पार पहुंच गयी है। इसमें से करीब 13 लाख पेड सब्सक्राइबर्स के साथ रविंद्रन की कमाई में पैसा बारिस की तरह बरस रहा है। रविंद्रन कुछ कंटेंट तो फ्री में उपलब्ध कराते हैं लेकिन जिस छात्रों को एडवांस लेवल की तैयारी करनी होती हैं, उन्हें फीस देनी होती है। और इस समय 13 लाख स्टूडेंट फीस देकर उनसे पढ़ रहे हैं।