इक क़तरा ख़्वाब का.....

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8th July, 2019, Edited by Shivangi Agarwal

फीचर्स डेस्क। परसों साँझ को एक तोहफ़े ने घर पर दस्तक दी ।लिफ़ाफा खोलते ही कुरकुरी, करारी महकदार पन्नों की फड़कन ने मुस्कान खींच दी चेहरे पर। वैसे भी दर्द से कराहते हुये किसी तोहफ़े को खोलना बत्तीसी निपोरने की वज़ह बन जाता है।  यह पुस्तक जिसका नाम "इक क़तरा ख़्वाब का" ,जिसे अपने अनुभवों की स्लेट पर ,भावनाओं की खड़िया से लिखा है एक परिपक्व सोच की लेखिका "नीना सिन्हा" जी ने।

पाठक के द्वारा किसी भी पुस्तक के भीतर घुसने से पहले जो पहला इश़्क होता है ,वो पहली नज़र का इश्क मुख्य पृष्ठ की सादगी को देखकर उमड़ता है , और ऐसा ही मेरे संग भी हुआ यही सितम क्या कम ठहरा कि...श्री माया मृग जी के दिशानिर्देश में इस पुस्तक के हर पन्ने पर नज़र और उंगलियाँ मलाई सी फिसलने लगी। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि- कुछ सानिध्य भले ही नहीं... मील के पत्थर से साबित होते हैं ,,,वो अनुपस्थिति में भी उपस्थित का भान कराते चलते हैं ,ऐसा ही इस पुस्तक में पाया मैंने । समर प्रकाशन द्वारा आये इस 'कविता संग्रह' में 159 कवितायें शामिल हैं । हर कविता का मूड़,भाव,गहराई एक दूसरे से विलग अपनी विशिष्टता लिये हुये है ।

नीना (दीदी )जी ने अपने अलग -अलग इमोशंस को एक भिन्न से अपितु सहज भाषा द्वारा सरल मुकाम पर पहुँचाया है । रात फिर खुलकर निख़री है तेरी याद की दुशाला सी ..... गहराईयों का कोई ख़ुदा नहीं होता.... कहकशाँ सी चलती है,कायनात है शोर करती है .... ज़िन्दगी की राहों पर ठोकरों से संभलती वो लड़की... फिर कोई रंगीन मुख़ौटा होगा,अपनी बेचैनियाँ ग़ैरों पर आजमायेंगे .... भ्रम से हमेशा बेहतर सच होता है.... ऐसी कविताओं का संग्रह याद दिलाता है कि- अरे यही तो हम भी सोच रहे थे,बुन रहे थे...। इस पुस्तक की छपाई बहुत ही संयम और ईमानदारी से की गयी है । पूरी तरह अभी पढ़ी नहीं है ये प्रशंसा पहली नज़र की चमक की मानी जाये ।  मूल्य भी अबै-तबै नहीं ...मात्र एक सौ पचास रुपए निर्धारित है ।

नीना दी सहृदय व्यक्तित्व की स्वामिनी हैं,किसी भी बवाल से दूर अपनी ही लय में बहती हुई ,कोई लेना एक न देना दो । इस होड़भरी दुनिया में ख़ुद को यूँ बचाकर,समेटकर चलना भी एक हुनर ठहरा । यह सहज प्रभावीपन आपको औरों से अलग करता है । आगाज़ बहुत प्यारा है.....इस शुरुआत हेतु अगणित बधाईयाँ और ढ़ेरों शुभेच्छायें ,,,दीदी आपको पढ़ने के अब नित नये अवसर मिलते रहें इन्हीं दुआओं के संग......

Preeti Raghav ke wal se ...