हिन्दू धर्म में ये चीजों अपवित्र होने के बाद भी पवित्र माना जाता है, जानें क्यों !

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21st July, 2018, Edited by Focus24 team

कानपुर सिटी। हमारे देश में कुछ चीजे ऐसी हैं जो अपवित्र होती है फिर भी उनको पवित्र माना जाता है। आपने देखा होगा की गाय का दूध निकालने से पहले गाय का बच्चा उसको झूठा कर देता है फिर हम लोग दूध निकालते हैं और यही दूध बाद में भगवान को चढ़ता है। यही नहीं इसका उपयोग देवी-देवताओं के अभिषेक के लिए किया जाता है और दूध से खीर और घी बनाते हैं जिनको नैवेद्य के रुप में भगवान को चढ़ाया जाता है। इसके अलावा और भी चीजें हैं जो अपवित्र होकर मिलती है लेकिन भगवान की पूजा में उन्हें पवित्र माना गया है। तो आइये जानते हैं वो कौन से पांच चीजे हैं जो अपवित्र होते हुए भी पवित्र मानी जाती हैं –

गाय का दूध

गाय का दूध पहले उसका बछडा पीकर झूठा करता है। इसके बाद भी वह अपवित्र नहीं माना जाता है। अपवित्र नहीं होने के कारण गाय के दूध को अमृत भी कहा जाता है।

 फूलों का रस यानि मधु

मधुमक्खी जब फूलों का रस ले कर अपने छत्ते पर आती है तब वो अपने मुख से उसे निकालती है यानी उस रस की उल्टी करती है। जिससे शहद बनता है और उसे फिर भी पवित्र माना जाता है। शहद का उपयोग मांगलिक कामों में किया जाता है। पांच अमृतों में शहद को भी  एक माना गया है।

रेशम का कीड़ा मर जाता है

रेशमी वस्त्र मांगलिक कामों और पूजा-पाठ में पवित्रता होनी जरूरी है। वहीं  रेशमी वस्त्र को भी पवित्र माना गया है, लेकिन रेशम को बनाने के लिये उसको उबलते पानी मे डाला जाता है और इससे उसमें रहने वाला रेशम का कीड़ा मर जाता है। उसके बाद रेशम मिलता है तो इस प्रकार शव कर्पट हुआ लेकिन यह फिर भी पवित्र है।

 पीपल का पत्ता

कौवा पीपल आदि पेडों के फल खाता है और उन पेड़ों के बीज अपनी विष्टा यानी मल में इधर उधर छोड़ देता है जिससे पेड़ों की उत्पत्ति होती है। पीपल भी काक विष्ठा यानी कौए के मल में निकले बीजों से पैदा होता है। फिर भी इसको पवित्र माना गया है। पीपल पर देवताओं और पितरों का निवास भी माना गया है।